जबां हिलाओ

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नेता होना बड़ी बात है

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इन दिनों जब भी अखबार पढता हूँ तो मेरी नजरें पूरे अखबार में यही तलाशती हैं कि कोई नया फर्जीवाड़ा सामने आया कि नहीं.अखबार मैं इंटरनेट पर ही पढता हूँ क्यूंकि यहाँ हर समय ताजा समाचार अद्यतित होते रहते हैं,असली पन्नों वाले अखबार में तो एक दिन पहले की खबरें ही मिलती हैं,अन्यथा वही स्थानीय खबरें,जैसे~दहेज़ के लिए विवाहिता को जलाया,भूमि विवाद में गयी जान,सड़क दुर्घटना में कितने मरे,फलां ने फलां चौक पर फलाने का पुतला जलाया,सुबह-सुबह मन खिन्न हो जाता है,बताइए!ये भी कोई समाचार है.
वैसे यह मेरी निहायत ही निजी राय है कि अगर कोई चीज वास्तव में पन्ने वाले अखबारों में पढने लायक होता है तो वो है सम्पादकीय पृष्ठ,वही एक ऐसी जगह है जहां थोड़ी मतलब की खुराक मिलती है.जब तक मैं स्कूल के दिनों में था~मेरा पसंदीदा पन्ना हुआ करता था खेल-पृष्ठ,फिल्म से सम्बंधित पृष्ठ और वो पन्ना जहाँ ये जानकारी रहती थी कि कौन सी फिल्म किस हॉल में चल रही है.
हमारी बहसें कुछ यों होती थी कि अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी में लड़ाई हो तो कौन जीतेगा,सनी देओल का हाथ सही में ढाई किलो से ज्यादा भारी होगा,संजय दत्त सच में क्रिमिनल है,या फिर शाहरुख़ को काजोल से शादी कर लेनी चाहिए(पता नहीं था कि शाहरुख़ शादी-शुदा है) आदि आदि.
अब यह वक़्त की बेवफाई है कि आज मेरा झुकाव खेलों,फिल्मों से अलग हटकर घोटालों पर आ गया है,निश्चित तौर पर जिधर इंसान को फायदा दिखेगा~उधर ही जाएगा.जब क्रिकेट की कमाई सबसे ज्यादा होने लगी तो सब क्रिकेट के शौक़ीन हो गए,किसी को बल्ला पकड़ने भले न आये,या गेंद से कभी पाला न पड़ा हो,लेकिन है कोई माई का लाल इस देश में जो सचिन तेंदुलकर को नहीं जानता,लेकिन अफ़सोस कि आज अनेकों बार व्यस्तता की वजह से चाहकर भी क्रिकेट देखकर ताली भी नहीं बजा पाते~इन्टरनेट पर ही लाइव कमेंटरी पढ़ते रहते हैं,कई फिल्में देखने के लिए सोचते ही रह जाते हैं~पता चलता है कि हम इंतजार में रहे और फिल्म ही बदल गयी.
काश किसी नेता के दामाद होते तो जिंदगी भर कमाने की चिंता ही न रहती,टी वी पर मैच देखने में वक़्त की कमी का कोई बहाना ही न होता,सीधे मैच का पास ही मिल जाता,आखिर जब नेता जी जन-नेता हुए तो उनका दामाद भी तो जन-दामाद हुआ न,और ये तो सबको पता है कि दहेज़ प्रथा दिनों दिन फैशनेबल ही होती जा रही है,ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही,तो थोडा सा हक़ तो दामाद जी का बनता ही है,आखिर ससुराल के बेहिसाब दौलत के बावजूद शादी बड़ी फीकी ही की थी,अब इतना भी नहीं करेंगे तो दामाद जी बुरा ना मान जायेंगे,आखिर किसी आम आदमी के दामाद थोड़े ही न हैं,इधर तो आम आदमी का दामाद भी कम भाव नहीं खाता,ये तो नेताजी के दामाद ठहरे,नेताजी कोई आम आदमी थोड़े हैं,बड़े आदमी हैं.
उनके बड़प्पन का अंदाजा मत लगाइए,गलती हो जायेगी~जितने में पूरी बारात खा ले,उतने का तो ये सिर्फ एक टाइम नाश्ता करते हैं,आप जितना कमाते-कमाते बूढ़े होकर थक कर बैठ जायेंगे,उससे ज्यादा नेताजी की एक दिन की आमदनी होती है.आप बीस बार पैसा जमा करके कभी हिम्मत कर के चौपहिया वाहन खरीदने की योजना बनाते हैं तब किसी अच्छे दिन जाकर खरीदते हैं और उसकी सवारी कर गौरवान्वित महसूस करते हैं तो उधर नेताओं की निकम्मी औलादें भी हेलिकोप्टरों,निजी-विमानों में चमचों की फ़ौज लिए बेपरवाह घूमती हैं.
जिसने नेता का बेटा होने के अलावा जिंदगी में कुछ किया ही नहीं,उसे कर्मठ,सुयोग्य,दूरदर्शी और पता नहीं क्या-क्या घोषित कर दिया जाता है.रूह काँप जाती है ये सोचकर कि क्या होगा जब ऐसे निकम्मे लोग देश की बागडोर थाम लेंगे,खैर ऐसी खानदानी परंपरा से बहुत बड़े लोगों का आर्थिक लाभ वांछित है,अतः निकम्मों के हाथ में अधिकार रहे,इसके लिए चालाक पूंजीपति भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते,आखिर पैसे पेड़ पर तो उगते नहीं फिर चुनावों में इतना खर्च कहाँ से हो जाता है.
हमको,आपको,सब को पता है सरकारी आंकड़ों और हकीकत में क्या समानता और क्या असमानता होती है,अतः जितना खर्च आयोग को कागज़ में दिखाया जाता है वो असल में होने वाले खर्च की परछाई भी नहीं होती.अब बताइए देश में इतने सारे हरामी धनी पूंजीपति भरे पड़े हैं जो देश लूटने वाली पार्टियों को अरबों में चंदा दे सकते हैं किन्तु भूख से मरते देशवासियों में इन्हें अपने मजदूर भी नजर नहीं आते हैं.गरीब की हाय जरुर लगती है,उपरवाले के यहाँ सबका हिसाब है,वो कुछ ले-देकर मामला ख़तम नहीं करता.
खैर सबकी अपनी किस्मत,जिसे जैसी मिली वैसे मजे कर रहा है,हमारे पल्ले चिंता करना ही आया,सो करते जाते हैं,और हमेशा करते ही रहेंगे.क्यूंकि चिंता तो दूर हो ही नहीं सकती,भ्रष्टाचार की मात्रा में नियंत्रण,कमी या बढ़ोतरी हो सकती है,लेकिन इसे पूरी तरह मिटाया ही नहीं जा सकता और दुसरे नेताजी के दामाद बनाने का जमीर इजाजत ही नहीं देता.
बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि जिस घर में दो नंबर का पैसा (गलत तरीके से अर्जित धन)आता हो उस घर की बेटी को कभी अपने घर मत लाओ,वरना संस्कार ख़राब हो जाते हैं,पूरा वंश कलंकित हो सकता है.

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
October 30, 2012

जिसने नेता का बेटा होने के अलावा जिंदगी में कुछ किया ही नहीं,उसे कर्मठ,सुयोग्य,दूरदर्शी और पता नहीं क्या-क्या घोषित कर दिया जाता है.रूह काँप जाती है ये सोचकर कि क्या होगा जब ऐसे निकम्मे लोग देश की बागडोर थाम लेंगे,खैर ऐसी खानदानी परंपरा से बहुत बड़े लोगों का आर्थिक लाभ वांछित है,अतः निकम्मों के हाथ में अधिकार रहे,इसके लिए चालाक पूंजीपति भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते गज़ब का लिखते हो भाई ! जो सबसे भ्रष्टाचार ज्यादा करता होगा वो भी भ्रष्टाचार के खिलाफ भाषण दे रहा होगा ! बढ़िया व्यंग्यात्मक शैली है आपकी ! लिखते रहिये

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 12, 2012

    सादर धन्यवाद बंधु,इतनी देर से मैं पृष्ठ पर आया,इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ.

vasudev tripathi के द्वारा
October 29, 2012

जननेता का दामाद जन दामाद होता है तभी तो धरतीपुत्र मुलायम के अखिलेश भी धरती के पोते निकले..!! और नेता जी उतना नाश्ता जितने में एक बारात खा जाती है एक बार में इसीलिए कर लेते हैं क्योंकि बारात और नेता दोनों मुफ्त में खाते हैं दूसरों का.! नेताओं की निकम्मी औलादें भी हेलीकाप्टर में बेपरवाह नहीं घूमती.. सबको पूरी परवाह रहती है कि बाप अब सांसदी लड़े और विधानसभा में मैं पहुंचूं.! राहुल बाबा को ही देख लीजिए.. कितनी मेहनत करते घूम रहे हैं लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल रहा ये और बात है.! नेता होना सच में बड़ी बात है राहुल भाई.. :)

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 1, 2012

    धन्यवाद वासुदेव भ्राता,वैसे राहुल बाबा अंडर-अचीवर नहीं हैं,उन्होंने तो अपनी औकात से भी ज्यादा बटोर लिया है,उन्हें तो ओवर-अचीवर मान लेना चाहिए.खैर नेता के घर पैदा हुए यही कोई छोटा अचीवमेंट नहीं है.मुलायम ने समाजवाद की नयी परिभाषा गढ़ी है,अतः उन्हें निश्चित ही कोई महाकाय पुरस्कार देना ही चाहिए :) टिप्पणी हेतु अभिवादन :)

Santosh Kumar के द्वारा
October 29, 2012

राहुल जी ,..सादर अभिवादन तीखा व्यंग्य ,..गलत पैसा बच्चों को गलत राह ही दिखाता है ,….हमारे पल्ले चिंता करना ही आया ,..करते ही रहेंगे ,..बहुत बहुत आभार

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 1, 2012

    संतोष जी,आपकी प्रतिक्रिया हमेशा उत्साह बढाती है,बुराई से लड़ने का आपका जज्बा भी हमेशा हौसला बढ़ता रहा है. :)

shashibhushan1959 के द्वारा
October 28, 2012

आदरणीय राहुल जी, सादर ! बिलकुल ठीक कहा आपने…. नेता होना बड़ी बात है, और नेता पुत्र या नेता दामाद होना तो उससे भी बड़ी बात है ! घातक व्यंग्य ! बहुत खूब !!

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 1, 2012

    सहृदय सादर धन्यवाद शशिभूषण जी :)

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 26, 2012

बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि जिस घर में दो नंबर का पैसा (गलत तरीके से अर्जित धन)आता हो उस घर की बेटी को कभी अपने घर मत लाओ,वरना संस्कार ख़राब हो जाते हैं,पूरा वंश कलंकित हो जाता है. हाँ सम्भावना को नाकारा नहीं जा सकता. बधाई , आदरणीय राहुल जी, सादर

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 1, 2012

    सादर धन्यवाद प्रदीप जी :)


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