जबां हिलाओ

break the silence

47 Posts

727 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4057 postid : 436

ऐसा कब तक चलेगा?

Posted On: 14 Oct, 2012 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मनमोहन जी शर्म कीजिये,मैं मानता हूँ कि वो दिन गए जब लोग शर्म से जान दे देते थे,कुछ लोग कहते हैं कि आज भी कुछ लोग शर्म से जान दे देते हैं,लेकिन मैं नहीं मानता क्यूंकि अब लोग असफल होने पर ही जान देते हैं,शर्म तो बची ही नहीं और जिनके पास बची भी है वो कोई ऐसा काम ही नहीं करते कि शर्म से जान देना पड़े.
इतनी असफलताओं के पश्चात भी राहुल बाबा ‘बबुआ’ ही बने हुए हैं,उन्हें तो एक डांट भी नहीं मिली,लेकिन मनमोहन जी बस कुछ मुट्ठी भर घोटालों के उजागर हो जाने भर से आप इतना मन मार कर मत जिया कीजिये,और वो भी आप असफल हुए कहाँ हैं,आपको तो जिस उद्देश्य के लिए पद पर बिठाया था वो तो निरंतर पूरा हो ही रहा है,एक तरह से आपका इस पद पर जमे रहना ही एक अभूतपूर्व सफलता है.
आपके मातहत खा-खा कर इतनी मोटी चमड़ी के हो गए हैं,किन्तु या तो वो आपको आपका हिस्सा ठीक से देते नहीं होंगे या आप ही खाने से डरने लगते होंगे,यही वजह है कि आपका सिर्फ बैंक बैलेंस बढ़ा है,रुतबा नहीं.आप पहले ऐसे सिंह हैं जिन्हें देख कर लगता है कि वास्तव में देश में कुपोषण बहुत बढ़ चुका है,आपको दिखाकर यू.एस. से फंड लेने में भी बहुत सहूलियत हो गयी है,वो भी बेचारे चौंक जाते हैं कि बहादुर सिखों की आज इण्डिया में ये हालत है.आप इन घोटालों की वजह से इतने बुझे-बुझे से रहने लगे हैं कि मुझे तो डर है कि कभी कोई इतिहासकार आपका नाम मनमोहन सिंह के बदले मनमोहन सियार न रख दे.
सोनिया के दामाद की चोरबाजारी उजागर हुयी तो यह उसका पारिवारिक मामला है,लेकिन मनमोहन जी दूसरों के दर्द से हमेशा दुखी रहे हैं अतः यह उनका परम कर्तव्य है कि जिसने उनके लिए महान ‘त्याग’ का ड्रामा किया उसके लिए वक़्त आने पर काम जरुर आये,या बेहद जरुरी था कि आपकी पूरी सरकार इन आरोपों की आँधियों में जमाई जी का रक्षा कवच बन जाये,जिससे उनकी आँख में अंधड़ के बालू का एक छोटा टुकड़ा भी न जा सके.लोग बेवजह मनमोहन जी को बलि का बकरा बनाते रहते हैं,वैसे कुछ लोग यह भी मानते हैं कि उनको राजनीति में लाया ही बलि का बकरा बनाने के लिए है.
वैसे मनमोहन जी,सिर्फ एक चीज हमेशा खटकती है कि आप हमेशा जनता को झूठा दिलासा क्यूँ देते हैं,आप कहते थे कि महंगाई घट जायेगी,लेकिन कब और किसके लिए घटी,यह शोध करना संभव नहीं है.यह तो सच है कि आपने आर्थिक विकास का जो दावा किया था वो कुछ समय पहले तक शत प्रतिशत सही था,जो घोटाले पहले लाख रुपयों के होते थे वो लाखों करोड़ों रुपयों के होने लगे,अगर आर्थिक समृद्धि न आई होती तो ये मुमकिन नहीं था.
हमारे गृहमंत्री जी हैं जिनका मानना है कि घोटाले चर्चा में आये तो नया घोटाला कर दो,लोग पुराना जल्दी ही भूल जाते हैं,अब देखिये न ये फ़ॉर्मूला कितना हिट है,कानून मंत्री की 71 लाख की ‘छोटी’ चोरी चर्चा में आई नहीं कि लोग अरबों का कोयला,वाड्रा इत्यादि भूल कर इसी के पीछे हो लिए,एक कुटिल नेता हैं जिनका मानना है कि अगर कोई किसी सौदे में दलाली खा लेता है तो उसे देश को हुआ घाटा नहीं मानना चाहिए,और तो और विदेशियों के साथ सौदा करने में ये जनाब इतने लीन हो जाते हैं कि देश का राष्ट्रीय ध्वज उल्टा हो या सीधा, उन्हें फर्क नहीं पड़ता,उन्हें तो सिर्फ सदन की सर्वोच्चता चाहिए,ताकि बहुमत वाले लूट सकें और देशवासी सिर्फ ताली बजाकर देखता रहे.ऐसे तमाम रत्न इनके मंत्रालयों में भरे पड़े हैं.
तमाम व्यवस्था बेलगाम हो चुकी है,सरकार का हर मंत्री अपने विभाग का मालिक हो चुका है,जिसकी निष्ठां इस देश या प्रधानमंत्री के प्रति नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ अपने आलाकमान के प्रति है,और हर तरफ से फजीहत झेलने के बाद भी सत्ता का ध्यान सिर्फ इस और है कि किस तरह पूरे पांच साल सरकार चलायी जाए ताकि लूटने का मौका हाथ से निकल न जाए,क्यूंकि यह तय नहीं है कि अगली बार भी लूटने का मौका इन्हें ही मिलेगा या कोई दूसरा हाथ मार ले जायेगा.
अब देश की बागडोर किन लोगों के हाथों में है,ये जानते हुए भी आप रामराज्य की कल्पना कर रहे हों तो आप वाकई बहुत आशावादी किस्म के इंसान हैं,बधाई हो.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 4.75 out of 5)
Loading ... Loading ...

24 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

D33P के द्वारा
October 25, 2012

राहुल जी नमस्कार ……..ये आक्रोश केवल आपका नहीं हर आम जन का है …….सच में .इन सत्ता के दलालों से जनता इतनी त्रस्त हो चुकी है …. क्या कहे ..सब खुले आम घूम रहे है और आम जन बेबस है

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 1, 2012

    आम जन अपना वश पहचान ले तब सफेदपोश खुले-आम घुमने को मजबूर हो जायेंगे,प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद दीप जी :)

alkargupta1 के द्वारा
October 22, 2012

राहुल जी , ये गैंडे की खाल हो गए हैं कितने भी अघात करो कोई चोट नहीं पहुंचती और इतने चिकने घड़े बन गए हैं कि इनके ऊपर कितना भी पानी डालो रुकेगा ही नहीं …… अति उत्तम आलेख के लिए बधाई

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 25, 2012

    अलका जी,सादर नमस्ते,उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद :)

akraktale के द्वारा
October 21, 2012

राहुल जी            सादर, कितनी भी सलाह दो मगर इस चिकने घड़े पर असर होने वाला नहीं है. सुन्दर आलेख पर बधाई.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 22, 2012

    धन्यवाद बंधुवर,असर होगा भी तो कैसे,कोई नींद में हो तो उसे जगा दें,पर जो नींद में जाने का हाथ कर ले उसे तो जगाना बिलकुल असंभव है,फिर आंसू बहाने से अच्छा है कि बीच में कुछ मुस्कुराते रहें.

vasudev tripathi के द्वारा
October 18, 2012

राहुल भाई, जिस किसी भी व्यक्त को इस सरकार पर रह-रहकर गुस्सा आ रहा होगा किन्तु बेचारा व्यक्त न कर पाने के कारन घूँट पी पीकर रह जा रहा होगा तो उसे आपका यह लेख पढ़ा दूंगा… उसकी सारी भड़ास भी निकल जायेगी और वो भी थोडा हँसते-मुस्कुराते.!! :)

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 22, 2012

    धन्यवाद वासुदेव भाई,अब क्या करें,दुखड़ा रोते रोते हमारे आंसू सुख गए लेकिन चोर थकने वाले नहीं,तो थोडा विनोद हो जाये तो कम से कम अपना भी कुछ भला हो :)

Dhavlima Bhishmbala के द्वारा
October 17, 2012

राहुल जी, बहुत अच्छा आक्रोश दिखाया है आपने और हो भी क्यों न, ये आक्रोश तो जनता के भीतर-भीतर  सुलग कर उन्हें और भी बीमार बना रही है…राजनीति का ये पाठ तो कभी समाप्त होने वाला है नहीं, हर राजनेता एक पशु से भी बत्तर  होता जा रहा है और अपने ही देश को खाये जा रहा है…सच कहा आपने शर्म आनी चाहिए | बहुत-बहुत बधाई |

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 22, 2012

    नमस्कार धवलिमा जी,प्रतिक्रिया देने हेतु समय निकालने के लिए धन्यवाद.

vaidya surenderpal के द्वारा
October 17, 2012

जी हजूरी करने वाले डमी संवेदनहीन प्रधानमंत्री को शर्म क्योँ आएगी । पर्दे के पीछे सोनिया और आगे घोटालेबाजोँ की मौज है ।

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 22, 2012

    बिलकुल सही कह रहे हैं सुरेन्द्र जी,वक्त निकल प्रतिक्रिया देने हेतु साभार धन्यवाद. :)

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
October 16, 2012

राहुल जी, शर्म उऩको क्यों आएगी जो खुद ही बेशर्म होकर कर रहे हैं परंतु सवाल यह भी है कि हम कब तक बेशर्मों की तरह उन्हीं की सुनते रहेंगे और उन्हीं को चुनते रहेंगे जो बाद में हमें भी बेशर्मी दिखाए।…..

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 17, 2012

    जी बिलकुल,हम तो उनको सुनते हैं,वे ही हमारी नहीं सुनते,वरना जितनी गालियाँ आम जनमानस एक नेता-रूपी चोर को सुनाता है,वो अगर सुन ले तो इसी जन्म में मोक्ष प्राप्त हो जाए,जब तक लोग जातिवाद/क्षेत्रवाद/भाषावाद से ऊपर नहीं उठते,सही प्रतिनिधियों का निर्वाचन हो पाना बहुत ही मुश्किल है.आपकी बेबाक प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद.

seemakanwal के द्वारा
October 16, 2012

राहुल जी उम्मीद पे दुनियां कायम है .

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 17, 2012

    बिलकुल सीमा जी,उम्मीद और हौसले के बिना तो कुछ भी संभव नहीं है,प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद.

sudhajaiswal के द्वारा
October 16, 2012

राहुल जी, लुटेरे नेता राम बन जायेंगे और रामराज्य आ जायेगा आज के हालत देखकर तो मुश्किल ही लगता है | बहुत अच्छा लेख, बधाई |

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 17, 2012

    धन्यवाद सुधा जी :)

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 16, 2012

jyada दिन नहीं चलेगा. प्रिय राहुल जी, सस्नेह, बधाई

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 17, 2012

    सादर नमस्कार प्रदीप जी,समर्थन देती प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद.

shashibhushan1959 के द्वारा
October 15, 2012

आदरणीय राहुल जी, सादर ! संतोष जी की टिपण्णी “”हमारा आशावाद मजबूत रबड़ जैसा हो गया है , …वो जितना खीचते हैं उतना बढ़ता जाता है ,..अच्छा भी है,..टूटने पर दोनों सिरे पर जोर लगाए नेताओं की जमीन तो उड़ेगी ,…चरम बिंदु करीब ही लगता है “”"”"” बहुत सटीक है ! एक छोर पर पक्ष है एक छोर पर विपक्ष है ! रस्साकशी चल रही है ! और अब यह टूटने की कगार पर ही है ! सबसे बड़ी दिक्कत यह है की टूटने के बाद भी एक-एक छोर दोनों के हाथ में तो रहेंगे ही ! समुचित वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव बहुत खल रहा है !

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 17, 2012

    शशिभूषण जी,सादर नमस्कार,आपका कहना बिलकुल सही है,रस्सी टूट भी जाये तो एक-एक सिरा दोनों के हाथो में होगा,कर्मयोगी अपने पथ पर अडिग रहे तो परिवर्तन अवश्य आएगा,आपकी प्रतिक्रिया हेतु साभार धन्यवाद.

Santosh Kumar के द्वारा
October 14, 2012

राहुल जी ,..सादर अभिवादन बहुत सीधा शानदार व्यंग्य ,.लुटेरे अपना काम दक्षता से अंजाम दे रहे हैं ,..वो पूरा सफल है ,.राहुल बबुआ प्रधान नहीं भी बने तो भी कोई गम नहीं ,..बहुत माल लूट लिया है ,..फिर विदेशी हाथ उनके साथ है ही ,…हम असफल हैं ,….हमारा आशावाद मजबूत रबड़ जैसा हो गया है ,…वो जितना खीचते हैं उतना बढ़ता जाता है ,..अच्छा भी है,..टूटने पर दोनों सिरे पर जोर लगाए नेताओं की जमीन तो उड़ेगी ,…चरम बिंदु करीब ही लगता है ,….बहुत अच्छे लेख के लिए हार्दिक आभार ..सादर

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    October 17, 2012

    धन्यवाद संतोष जी,आपकी टिप्पणी से हमेशा हौसला मिलता रहा है,मंच पर बहुत अंतराल के बाद आने की माफ़ी चाहता हूँ.


topic of the week



latest from jagran