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त्याग-पुरुष:मनमोहन

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श्री मनमोहन सिंह जी हमारे देश के १८वे प्रधानमन्त्री हैं,जवाहरलाल नेहरु के बाद वे पहले प्रधानमंत्री है,जिन्होंने ५ साल का कार्यकाल ख़त्म करने के बावजूद भी सत्ता में वापसी करने में सफलता हासिल की है.वह स्वतंत्र भारत के पहले गैर-हिन्दू प्रधानमंत्री हैं.इनका जन्म २६ सितम्बर १९३२ को पंजाब प्रांत के गाह नामक क़स्बे (अब पाकिस्तान) में हुआ था.
मनमोहन सिंह जी एक विख्यात अर्थशास्त्री हैं,उनके बारे में अधिकतर जानकारी विकिपेडिया एवं अन्य स्रोतों से भी मिल जायेगी.किन्तु गहरे सागर में पैठकर ही मोती मिलेगा,आइये गोता लगाइए.
मेरे गुरुओं ने बचपन में सीख दी थी कि नीच से नीच व्यक्ति से भी हम कुछ अच्छा जरुर सीख सकते हैं,उन्ही की सीख को सामने रखकर मैंने मनमोहन जी के बारे में मीडिया और आम लोगों के जेहन में भरी तमाम कटु आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए कुछ अच्छा सोचने का प्रयास किया,और यकीन मानिए,काफी अच्छी बातें नजर में आ गयी,जिनका पालन करने से आप निस्संदेह सफलता की सीढियां चढ़ते जायेंगे.
तो मित्रो मुझे जो निष्कर्ष मिला है,मैं चाहता हूँ कि आप भी इन सकारात्मक बातों को ग्रहण करें,एवं मुझपर स्वार्थी होने का आरोप न लगायें कि समूचा ब्रह्म-ज्ञान अकेले ही मार ले गया.अतः आपके साथ बांटने की कोशिश करता हूँ,संभव हो तो ग्रहण करने की कोशिश कीजियेगा.
मनमोहन जी भारत की छवि को लेकर बहुत गंभीर रहते हैं,भारत की छवि को कोई नुकसान न पहुँचने पाए,इसकी हरसंभव कोशिश उन्होंने हमेशा की है,याद कीजिये जब न्यूक्लिअर डील के मुद्दे पर सारा देश मुंह बाए खड़ा था कि आखिर यह डील है क्या? ….९० प्रतिशत से ज्यादा आबादी आज भी नहीं जानती है कि वो न्यूक्लिअर डील क्या अहमियत रखती थी…किन्तु मनमोहन जी,जो अत्यंत ही विद्वान् और दूरदर्शी नेता हैं,उन्हें पता था कि कुछ समय पर कड़े फैसले भी लेने जरुरी होते हैं,उन्हें ही पता था कि इस डील से देश कितनी ज्यादा उन्नति कर लेगा….अतः उन्होंने तमाम आलोचनाओं के बावजूद भी डील साइन करने का मन बना लिया…और एक बार जो कमिटमेंट कर ली तो फिर वो जनता की भी नहीं सुनते,लेकिन अहम् प्रश्न यह था कि सहयोगी दल(माकपा) भी इस सौदे के खिलाफ थी,मनमोहन जी को रिस्क बहुत बड़ा था,लेकिन सिंह कभी पीछे नहीं हटता.सरकार गिरने की पूरी संभावना के बावजूद भी मनमोहन जी ने जरा भी धैर्य नहीं खोया और अपने विशाल ह्रदय को मजबूत कर लिया,उन्होंने दिखा दिया कि उन्हें पद,प्रतिष्ठा,पैसे का कोई लोभ नहीं है,सुना है मोटी रकम का गुप्त दान कर उन्होंने देवताओं का आशीर्वाद ग्रहण किया और देश-हित में न्यूक्लिअर डील और सरकार बचाना दोनों जरुरी था,अतः धन का त्याग कर उन्होंने दो निशाने एक ही तीर में साध लिए,यह एक अद्भुत ऐतिहासिक क्षण था,देश के लोगों के लिए अपना सब कुछ समर्पित करने को तैयार इस महामूर्ति का मन किसी प्रकार के लोभ के मायाजाल में नहीं बंधा है.आपको अभी नहीं लग रहा है,लेकिन आप देखिएगा एक न एक दिन इसका फल जरुर पककर तैयार हो कर हमारे सामने आएगा……..और उस दिन आपभौंचक्के रह जायेंगे.डॉक्टर जब मरीज का ऑपरेशन करता है तो मरीज का दर्द उसके हाथ नहीं रोकता,मनमोहन जी जानते हैं कि उन्हें किस इलाज की जरुरत है.
यह मनमोहन जी ही हैं जो जानते हैं कि रोते हुए को चुप कैसे करवाया जाए,अपना काम कहीं अटका हो तो कैसे निकलवाया जाए,किन्तु इस महान व्यक्तित्व के कर्मों से प्रेरणा लेने को किसी को फुर्सत ही नहीं,दिन भर बैठे सिर्फ लोगों के बारे में बुरी बातें करते रहते हैं,याद कीजिये १९९१ में जब बढे हुए टैक्स से लोग व्यग्र थे,तब भी मनमोहन जी ने अपने सरल संयमित अंदाज में लोगों को धीरज बंधाया था कि नए टैक्स लगेंगे लेकिन महंगाई नहीं बढ़ेगी(???).और तब से लेकर आज तक महंगाई बढ़ी?
लेकिन ज्यादा विचारवादी होने की जगह अगर तथ्यपरक रूप से सोचें तो पता चलता है की वो सच कह रहे थे,अगर झूठ सुनकर ही किसी के दिल को शांति मिलती है,तो वो झूठ पुण्य समझा जाता है,और तब से मनमोहन जी ने यह फैसला कर लिया कि चाहे जिंदगी में कितने भी झूठ बोलने पड़े,लेकिन लोगों को खुशियों का हर सब्जबाग दिखायेंगे.पुरोधाओं ने कहा है कि “सत्यं ब्रुयात,प्रियं ब्रुयात;न ब्रुयात सत्यं अप्रियम.”…अर्थात सत्य बोलिए,प्रिय बोलिए,अप्रिय सत्य कभी न बोलिए.यह साबित करता है कि मनमोहन जी के अन्दर हमारी संस्कृति कूट-कूट कर भरी है,वो हम सब से कहीं ज्यादा हिन्दुस्तानी हैं..सिर्फ हमारी फिल्मों की तरह वो I AM PROUD TO BE AN INDIAN नहीं चिल्लाते तो क्या,असली हीरो काम करता है,पंचलाइन नहीं मारता और मनमोहन जी हमारे असली हीरो हैं.
………………….देश के लोगों के भले के लिए ही उन्होंने देश भर में घूम घूम कर कहा कि वो बहुत मजबूत प्रधानमंत्री हैं,ऐसे ही जैसे फेविकोल का जोड़ है,आसानी से नहीं टूटता..वो सच में इतने मजबूत हैं कि उनकी मजबूती का सही अंदाज़ा लोगों को हो गया तो मौजूद आंकड़ों का इस्तेमाल विदेशी देश के खिलाफ कर सकते हैं,इसलिए उन्होंने कलेजे पर पत्थर रखकर लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया,और अपना समय लोगों को यह आश्वस्त करने में लगाया कि वो वाकई बहुत मजबूत हैं,अगर आडवाणी जी लौह पुरुष हैं तो मनमोहन जी भी वज्र-पुरुष हैं.खैर इतिहास दुहराते हुए एक बार फिर मनमोहन जी ने सत्ता का शीर्ष पद न चाहते हुए भी स्वीकार किया,या फिर उनपर थोप दिया गया.किन्तु देश के लोगों को भ्रम में रखकर चुनाव जीतना इन्हें मन ही मन कचोटता रहा,अतः उन्होंने ऐसे संकेत देना शुरू कर दिया कि अब उनका जमीर लोगों की इतनी बद-दुआएं स्वीकार करने से कतरा रहा है,लोग नहीं समझ पा रहे हैं कि एक दिग्दर्शी अपना सब कुछ त्यागकर उन्ही के भले के लिए उनसे झूठ बोलता आया है,और बजाय उसकी शान में कसीदे काढने के उलटे उन्ही को दोषी कह रहे हैं.अतः उन्होंने मौका मिलते ही कह ही डाला कि ‘मैं मजबूर हूँ.’ ऐसा कहकर उन्होंने यह दिखाया कि अब भी वे थके नहीं हैं,देश के लिए बहुत कुछ देना चाहते हैं,किन्तु मजबूर हैं..इस पंक्ति में उनका प्रायश्चित भी छुपा था,जिसे पारखी लोग समझ गए होंगे,कि जो पाप उन्होंने खुद को मजबूत बता कर अनजाने में कर डाला था,उसको स्पष्ट रूप में इन्होने स्वीकार लिया कि वो वास्तव में मजबूत नहीं थे,किन्तु उन्होंने खुद को इस रूप में प्रदर्शित किया जिससे जनता एक बार फिर उन्हें ही सत्ता में पहुंचाए,क्यूंकि एक उनकी ही पार्टी है जो आम आदमी की इतनी दुर्गति होने के बाद भी अपने वचन से पीछे नहीं हटती और आज भी सीना ठोक कर बड़े बड़े पोस्टरों में कहती है कि’आम आदमी के साथ उसी का हाथ है.’ भारत निर्माण को चरम तक पहुँचाने के लिए इतना झूठ बोलना क्या कोई पाप है??मेरी नजर में उन्होंने कुछ गलत नहीं किया.
फज़ल गुरु,आमिर अफज़ल कसाब जैसे दरिंदों को भी दया बख्श कर उन्होंने सम्पूर्ण विश्व के सामने भारत की अहिंसावादी छवि को मजबूत ही किया है,वही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जैसे कट्टर हिन्दुओं को स्पष्ट सबूतों के अभाव में भी कारागार में यातना देकर उन्होंने सिद्ध किया है कि भारत में धार्मिक भेदभाव भी बिलकुल नहीं होता है.भारत देश की छवि को लेकर इन फैसलों पर कड़ाई से अमल कर पाना किसी भी कमजोर दिल वाले इंसान के लिए संभव नहीं हो सकता,लेकिन मनमोहन जी किसी कीमत पर भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि से खिलवाड़ नहीं करना चाहते,यह उनके महान व्यक्तित्व का एक पहलू मात्र ही है कि भारत की साख बचाने के लिए वो बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने को सदा से व्यग्र रहते आये हैं. अभी कुछ दिनों पहले ही लोग चिल्लाने लगे कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से देसी रोजगार धंधे तबाह हो जायेंगे,कामगार भूखों मरने को विवश हो जायेंगे किन्तु मनमोहन जी किसी सूरत में पीछे हटने के मूड में नहीं थे,वो तो बुरा हो दूसरों का जिन्होंने संसद में इस महत्वाकांक्षी योजना को मटियामेट कर दिया…भारत निर्माण के मार्ग में इस सपने को जो विराम मिला है,उसके लिए मनमोहन जी कहीं भी उत्तरदायी नहीं हैं,वो तो बस भारत की साख को लेकर ही चिंतित हैं,अब साख ही गिर जायेगी तो फिर उनके सहयोगी अपना उल्लू कैसे सीधा कर सकेंगे,ये वाकई गहन सोच का प्रश्न है..
ऐसे महान व्यक्ति की प्रशंसा में जो भी कहा जाए कम होगा,आइये हम भी इस महान राजनेता से कुछ सीखें जिससे हमारे अन्दर भी देश की छवि बचाने के लिए हर कुर्बानी देने की भावना बलवती हो
मनमोहन जी कितने विशाल ह्रदय के स्वामी हैं इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अपनी किसी भी उपलब्धि का श्रेय वो खुद नहीं लेना चाहते,बल्कि हर बात का श्रेय वो उस औरत को देते हैं जो अपने पति की मौत के बाद सारा मामला सेटल करके खुद को भारतीय जनता की सेवा में झोंक चुकी है और इस देश का नेतृत्व करने का मौका गँवा देने के बाद अपने पुत्र के परिपक्व होने के इंतजार में हैं ताकि मनमोहन जी के सर से देश सेवा का भारी बोझ अपने बेटे के कंधे पर डाल सके.इतना महान त्याग करने वाली महिला के प्रति यह सम्मान प्रदर्शित करता है कि मनमोहन जी महिलाओं की कितनी इज्जत करते हैं,साथ ही उनको प्रशस्ति पाने का भी कोई लोभ नहीं है.
ऐसे महान पुरुष को मेरा शत बार नमन है,उनमे सीखने को बहुत कुछ कूट-कूट कर भरा है,उम्मीद हैं आप भी इनके महान व्यक्तित्व से कुछ प्रेरणा लें और यदि संभव हो तो देश-हित में उनके प्रति अपना नजरिया बदलने की कोशिश करें.जय हो.



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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sumit के द्वारा
January 16, 2012
    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 18, 2012

    धन्यवाद सुमित :)

manoranjanthakur के द्वारा
January 9, 2012

बधाई व सुभकामना सुंदर विचारनिए पोस्ट और नव बर्षके लिए

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 10, 2012

    बहुत बहुत धन्यवाद मनोरंजन जी….असली मनोरंजन तो आपको पढ़कर ही होता है…आपको भी ढेर सारी शुभकामनाएं,नव वर्ष में आप प्रफुल्लित रहें. :)

dineshaastik के द्वारा
January 9, 2012

राहुल जी आपका आभार,जो आपने हमारे अमहान,अपूजनीय, असत को राजनैतिक अवगुणों से सुशोभित किया। उनकी नीतियों के दुष्परिणाम से भारत जन धन्य हो गये। हम भी इनसे अप्रेरणा लेकर ऐसा ही कुछ करेंगे। ऐसे ज्ञान-वर्धक आलेख के लिये आपका आभार करना तो भूल ही गया था। आभार…………

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 10, 2012

    आपकी सराकात्मक प्रतिक्रिया हेतु आपका आभारी हूँ दिनेश जी :)

jlsingh के द्वारा
January 7, 2012

राहुल जी, आपके महान शोध को नमन! आपने बड़े ही सूक्ष्म तीर चलाये हैं! देखन में छोटन लगे घाव करे गंभीर! काश यह शोध विपक्ष के हाथ लग जाय जिससे चुनाव प्रचार में उन्हें मदद मिल सके! बहुत बहुत बधाई!

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 10, 2012

    बहुत धन्यवाद सिंह जी,अगर इसे कांग्रेस पार्टी अपना चुनावी परचा बनाना चाहे तो भी मुझे कोई आपत्ति नहीं…हौसला बढ़ाने के लिए आपका आभारी हूँ.

sumandubey के द्वारा
January 7, 2012

राहुल जी नमस्कार, मनमोहन जी संत है देश हित में वो जो कार्य कर रहे है वह राजनीती के अवगुणों को आत्मसात करने के कारण करना पड़ रहा है उन्हें भारतीय सीख देने में माहिर होता है वह आम हो या ख़ास बढ़िया व्यंग्य आपको नव वर्ष की बधाई .

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 10, 2012

    नमस्कार सुमन जी,आपने मनमोहन जी के विषय में सकारात्मक चीजें ध्यान में राखी,इसके लिए आपका आभारी हूँ,वक्त निकालकर धैर्य के साथ आपने इस शोध पत्र को पढ़ा,इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ :)

nishamittal के द्वारा
January 6, 2012

राहुल जी बेचारे मनमोहन जी पर नववर्ष में इतने तगड़े प्रहार! कुछ तो चिंता करते उनकी इतनी सर्दी में .बेचारे लाज के मारे कम्बल तानकर सो नहीं सकते नहीं तो मैडम का फरमान हो जाएगा और उनकी सिट्टी पिट्टी गम हो जाएगी

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 9, 2012

    नमस्कार निशा जी,मैं तो सरदार साहब की शान में कसीदे काढ रहा था,अब ये उन्होंने ही अपनी छवि ऐसी बना ली है की लोग उल्टा ही सोचेंगे,फिर भी आपने सराहा,इसके लिए धन्यवाद.

Rajkamal Sharma के द्वारा
January 5, 2012

प्रिय राहुल जी …… नमस्कारम ! इनका सबसे बड़ा समर्थक तो मैं ही हूँ ….. आखिरकार इन पर मैंने प्रधानमंत्री की साफ़ सफाई भाग एक और दो लेख जो लिखे थे ….. इसलिए कम से कम मेरे बारे में तो आप निश्चिंत रहिये ….. हा हा हा हा हा हा हा नया (पांच दिन पुराना ) साल मुबारक

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 9, 2012

    सादर नमस्कार राजकमल जी :) मैंने प्रधानमंत्री की आपके मातहत भेजी सफाई भी पढ़ी थी :) आपके बारे में मैं निश्चिंत ही हूँ.

Vasudev Tripathi के द्वारा
January 5, 2012

राहुल जी, लेख के लिए किए गए आपके अनन्य प्रयास व आपकी सूक्ष्मदर्शी दृष्टि को मेरा सादर नमन है जिससे आप मौनव्रती के चरित्र से भी यह झंकार निकाल लाये! बहुत ही उम्दा प्रशंसा योग्य लेख!

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 9, 2012

    बहुत धन्यवाद वासुदेव भाई,आप लोगों ने सुधि ली इसके लिए आपका आभारी हूँ.

Deepak Sahu के द्वारा
January 5, 2012

राहुल जी ! क्या खूब परिचय दिया है, स्वामिनी भक्त का! इस वज्र-पुरुष को मेरा भी नमन है! दीपक

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 9, 2012

    बहुत धन्यवाद दीपक भाई :)

Santosh Kumar के द्वारा
January 5, 2012

राहुल जी ,.नमस्कार आपने बड़े रोचक अंदाज में गुलाम शिरोमणि और सच्चे नमक हलाल के महान कृत्यों को उजागर किया है ,..ऐसे त्याग पुरुषों को नमन करने का दिल करता है जिनकी वजह से हम लगातार गुलामी का आनंद ले रहे हैं ,.लानत है हम पर जो दिल की बात नहीं सुन पाते हैं ,….अब अन्दर की बात किसे पता होगी ,..लेकिन आपने शोध कर ही लिया है तो मेरे मूरख मन में एक प्रश्न उठता है ,…..अंकल जी अपना एक हाथ हमेशा जेब के अन्दर क्यों रखते हैं ?….

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 5, 2012

    संतोष जी नमस्कार ‘सच्चाई छिप नहीं सकती बनावट के उसूलों से,कि खुश्बू आ नहीं सकती कागज़ के फूलों में.’ आपका धन्यवाद जो आपने मनमोहन जी के बहुत अन्दर छिपे सार-तत्व को ग्रहण किया,इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आपकी टिप्पणी में किया गया प्रश्न है…आप जैसे शोधार्थी भी अगर अपनी कमर कस लें तो इस महान प्रतिभा को और दमन न सहना पड़ेगा. आपने धैर्य रखकर मेरे शोध पात्र का सारांश पढ़ा इसके लिए आपकी सराहना करता हूँ. :) :D :P :)

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 5, 2012

    राहुल जी ,..यह महान प्रतिभा अभी देश का कितना बंटाधार करेगी ,यह तो नहीं पता है …सार तत्व तो पूरा देश जानता है ,…टिपण्णी में मेरा प्रश्न दरअसल मेरा मौलिक प्रश्न नहीं है ,..एक दिन टी वी देखते हुए मेरे सात वर्षीय बेटे ने यह प्रश्न किया था ..आपका शोधपत्र पढ़कर मुझसे रहा नहीं गया और इस बात को आपके सामने रख दिया ,..आपको अच्छा लगा आभार आपका

Santosh Kumar के द्वारा
January 5, 2012

राहुल जी ,.नमस्कार आपने बड़े रोचक अंदाज में गुलाम शिरोमणि और सच्चे नमक हलाल के महान कृत्यों को उजागर किया है ,..ऐसे त्याग पुरुषों को नमन करने का दिल करता है जिनकी वजह से हम लगातार गुलामी का आनंद ले रहे हैं ,.लानत है हम पर जो दिल की बात नहीं सुन पाते हैं ,….अब अन्दर की बात किसे पता होगी ,..लेकिन आपने शोध कर ही लिया है तो मेरे मूरख मन में एक प्रश्न उठता है ,…..अंकल एक हाथ हमेशा जेब के अन्दर क्यों रखते हैं ?….


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