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'मर्यादित' आलोचना

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जब यह खबर सुनी कि हमारी(?) सरकार इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामग्रियां हटाने को लेकर बहुत कम समय में बहुत ज्यादा चिंतित हो उठी है,तो बहुत ज्यादा हंसी आई.इस खबर को लेकर तरह तरह के चुटकुले बनाये गए,जिनमे से अधिकतर सच को लगभग व्यक्त भी कर रहे थे…
जैसे-कांग्रेस आलाकमान ने सभी मंत्रियों को आदेश दिया है कि इतना मूर्खतापूर्ण बर्ताव करो कि ‘अमूल बेबी’ समझदार लगने लगे! कपिल सिब्बल का ताज़ा कदम उसी कड़ी का हिस्सा है!…या फिर,सरकार इस बात से परेशान है कि लोग उसके खिलाफ गलत बोल रहे हैं मगर वो ये सोचने की फुरसत नहीं निकालती कि आख़िर लोग ऐसा बोल ही क्यों रहे हैं!-फेकिंग न्यूज़‘अंग्रेजों की नीति थी-फूट डालो और राज करो,इंदिरा कॉँग्रेस की नीति है-फूट डालो,उलझा दो और राज करो.’
एक और बड़ा वाजिब सा प्रश्न भी पिछले दिनों नेट जगत पर चर्चा में रहा कि ३८ वर्ष की उम्र में राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर एवं कुछ अन्य युवाओं ने अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हुए अपार सफलता अर्जित की है,इन्हें भारत सरकार द्वारा भी विभिन्न अलंकरणों से सम्मानित किया गया है,किन्तु सत्ताधारी दल के स्वघोषित ‘युवराज’ ४१ की उम्र में भी ‘बेबी’ कहे जाते हैं,उनकी बयानबाजी भी कुछ इस संदेह को पुख्ता करती है…शायद इसलिए क्यूंकि पहले दोनों ने शोहरत अपने बूते अर्जित की है,जबकि नन्हे गाँधी पर शोहरत थोप दी गयी है,क्यूंकि वो बाकी किसी भी क्षेत्र में शोहरत अर्जित करने लायक नहीं थे,किसी तरह संभाल रहे हैं,शोहरत की खानदानी विरासत को.
फिर भी विभिन्न स्वार्थी मीडियाकारों द्वारा इन्हें ‘युवाओं का स्वघोषित आदर्श’ के रूप में देश की युवा पीढ़ी पर थोपा जा रहा है,जबकि इन्होने अपनी पूरी जिंदगी में कोई ऐसा काम किया हो जिसे आदर्श के रूप में पेश किया जा सके,मुझे नहीं पता.आखिर मुझे यह जानने का हक़ है कि मैं राहुल गाँधी को अपना आदर्श क्यूँ मानूं?…..मैं इतना निठल्ला नहीं बनना चाहता कि युवावस्था के अंतिम पड़ाव में अपनी खानदानी विरासत संभालने के अलावा मेरे पास कोई चारा न रहे.
…….खैर,बहुत सारे लोग इन्हें पढ़कर आनंद उठाते हैं,कईयों के दिल में ये सभी बातें नश्तर की तरह चुभती भी हैं,क्यूंकि इनका कोई तार्किक जवाब नहीं दे सकते,अतः मामले को दूसरी दिशा में बहका ले जाते हैं…….वैसे सच कहूं तो मेरा भी ये मानना है कि कभी-कभी नेट पर विरोध-स्वरुप प्रसारित की जा रही तसवीरें वास्तव में शालीनता की सीमा का उल्लंघन करती हैं,मुझे बहुत बुरा लगता है जब मैं स्वामी रामदेव और अन्ना हजारे जैसे चरित्रवान व्यक्तियों की संपादित की गयी तसवीरें कुछ राजनीतिक महिलाओं के साथ देखता हूँ.इन दोनों से किसी को वैचारिक या सैद्धांतिक आपत्ति हो सकती है,किन्तु इनके चरित्र पर कोई ऊँगली नहीं उठा सकता है.
किन्तु,जहां तक मुझे लगता है,भ्रष्टाचार के अनेक आरोपों से घिरे और जनता द्वारा खारिज किये जा चुके एक व्यक्ति ने पिछले पूरे वर्ष भर लोगों की भावनाओं को भड़काने का जो घृणित कृत्य किया है,उसे रोकने के लिए किसी ने एक बयान तक जारी करना जरुरी नहीं समझा.ध्यान दीजियेगा,ये वही शख्स है जो हमेशा कहता है कि उसके पास विभिन्न आतंकवादी घटनाओं से सम्बंधित पुख्ता सबूत हैं,लेकिन यह शख्स कभी इन सबूतों को जांच आयोग के सामने नहीं रखता,और न ही सरकार कभी इससे इन सबूतों को सामने लाने का आग्रह करती है,पता नहीं कहीं सबूतों की आड़ में ये ‘असली’ आतंकवादियों को ब्लैकमेल तो नहीं कर रहा?…….जो भी हो,सरकार को कम से कम एक ‘सफाई’ तो देनी चाहिए थी.
नेट पर ही एक तस्वीर में एक मंत्री उलटे तिरंगे के सामने अंतर्राष्ट्रीय डील पर हस्ताक्षर कर रहे थे,खैर तिरंगे की परवाह कैसे करते जब ‘डील’ पर ही समूचा ध्यान केन्द्रित था.वैसे यह तस्वीर असली थी,इसके साथ कोई छेड़खानी नहीं की गयी थी.यह वही कानूनची हैं जो जी-हुजूरी को उन्नति का एक उन्नत मार्ग मानते हैं,यही महानुभाव कुछ दिनों पहले टू जी घोटाले के बारे में देश को गुमराह कर रहे थे कि स्पैक्ट्रम आवंटन से देश को कोई घाटा नहीं हुआ है,तो क्या अब वे स्वीकार करेंगे कि पिछले कई महीनों से उनके भूतपूर्व मंत्रीगण तिहाड़ जेल में उद्यान भ्रमण कर रहे हैं,वहाँ उनका इतना मन रम गया है कि अभी वापस ही नहीं आना चाहते.और कई सारे मंत्रियों को तो जबरदस्ती बाहर रोक कर रखा गया है,वरना वो तो तिहाड़ की मनमोहक छटा का आनंद लेने के लिए कब से बेताब बैठे हैं,रोज मैडम जी से पूछते हैं कि ‘मेरा नंबर कब आएगा?’….और कोई जवाब न पाकर दिन भर मायूस बैठे रहते हैं…………बकवास की भी हद होती है,शर्म करो.
आज जब समूचा भारतीय नेट जगत राजनीति की आलोचनाओं (मर्यादित और अमर्यादित) से भरा पड़ा है,तब जाकर इन्हें ताव आया है,लेकिन मैं पूछना चाहूँगा कि जब नेट पर भारत देश का विकृत नक्शा प्रसारित किया जाता है,तब तुम्हारा ताव कहा चला जाता है,उस समय तुम तैश में आकर वेबसाईट वालों की बग्घियाँ क्यूँ नहीं उघेड़ते हो,क्यूँ नहीं कहते कि तुरत गलत चीज नहीं हटाई तो प्रतिबन्ध लगा देंगे?
भारत सरकार की ‘रोटी’ खाते हो और ‘लोकतंत्र’ के नाम पर ‘हिन्दुस्तान मुर्..बाद’ के नारे लगते मरे मुरदे की तरह देखते रहते हो.
आज जब तुम दुसरे की आंख के तिनके को संड़सी लगाकर निकालना चाहते हो,अपनी आँख का शहतीर क्यूँ नहीं देखते………क्यूंकि तुम बुजदिल हो,क्यूंकि तुम सिर्फ जी-हुजूरी की चाशनी में खुद को डुबोकर ‘मालिक का वफादार’ बनना चाहते हो.क्यूंकि तुम्हारा दिल हिन्दुस्तान के लिए नहीं,एक ‘खानदान’ के लिए धड़कता है,इसलिए क्यूंकि तुम उनके एहसानों तले दबे हुए हो,क्यूंकि तुम्हारी आँखों से शर्म का पानी सूख चुका है और तुम घड़ियाली आंसू ग्लिसरीन की मदद से बहाते हो,क्यूंकि तुम इंसान नहीं हो,तुम्हे ‘रिमोट कण्ट्रोल’ से चलाया जाता है,तुम खिलौने हो,जिस दिन मन भर गया,फेंक दिए जाओगे.तुम बेहद स्वार्थी हो.क्यूंकि तुमने अमीर बनने के लिए अपने जमीर को बेच दिया है.
एक बात का जवाब दे सकते हो तो जरुर देना,माँ-बेटे और ‘स्वामिभक्त’ अक्सर जरुरी मौकों पर चुप्पी क्यूँ साधे रहते हैं…….क्या इनपर भी कोई सेंसर लगा रखा है?

तुम हमारे प्रतिनिधि हो,लेकिन तवज्जो पूंजीपतियों को ज्यादा देते हो,तुम नमक-हराम हो
.यह सब तुम्हारे जैसे लोगों के अमीर बनने के फितूर का फल है कि आज निराश जनता नक्सली आन्दोलन पर उतर आई है,और उनसे लड़ने में वैसे लोग शहीद हो रहे हैं जो देश के लिए अपने जान की परवाह नहीं करते,तुम तो मजे में ‘भारत निर्माण’ कर रहे हो…तुम्हारी मौत होती है तो सारी कालिख दब जाती है,और तुम ‘ख़ास’ हो जाते हो.
जब सब लोग तुम्हारी तरफ ऊँगली उठा रहे हैं तो तुम सबकी ऊँगली काट लोगे,लेकिन अपनी कमियों को तब भी स्वीकार नहीं करोगे,क्यूंकि तुम मूढ्मति हो,गाँधीजी के आदर्शों की धज्जियाँ तो तुम देश की आजादी के समय से ही उड़ाते आ रहे हो,अब नेट जगत पर तुम्हारे कुकर्मों से गांधीजी के बन्दर तक भी बदनाम हो गए,हे महा-भ्रष्टाचारियों काश तुम्हारे भीतर भी कुछ शर्म बची होती…..तुम इंसानियत के नाम पर पैसे जुटाना भर जानते हो,तुम पैसे के लिए बोलते और पैसे के लिए चुप रहते हो,तुम धरती पर सांस लेकर भी नरक में रहते हो,क्यूंकि लोगों का ह्रदय तुम्हे धिक्कारता है.किस किस का मुँह बंद करोगे तुम?
तुम सत्ता के मद में चूर हो…हाथी जैसे मतवाले हो रहे हो,तुम्हें तुम्हारी ताकत असीम लग रही है,लेकिन यह मत भूलो कि यह हमारी जनता की ताकत थी जिसने अंग्रेजों से आजादी दिलायी थी,…सत्ता तो तुम्हारे जैसे लोगों ने हथियाया …….. तुम जो भी हो हमारे रहम-ओ-करम के मोहताज हो,तुम्हें हम ने ही सर पर चढ़ाया है,दो पलों के बाद मिटटी में भी मिला सकते हैं.हम डरते नहीं हैं तुमसे,तुम्हारी ताकत का समूचा आस्तित्व हमारी ऊँगली के एक इशारे पर टिका हुआ है.
अपनी औकात समझो और औकात में रहो.



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31 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
January 7, 2012

बहुत ही सुन्दर! मर्यादित आलोचना पढ़कर मन खुश होता है! खासकर “हम डरते नहीं हैं तुमसे,तुम्हारी ताकत का समूचा आस्तित्व हमारी ऊँगली के एक इशारे पर टिका हुआ है.” यह पंक्ति हमें याद रहनी चाहिए…

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 8, 2012

    बहुत धन्यवाद सिंह साहब,आपको इस आलेख में कुछ याद रखने लायक लगा,इसके लिए आपका आभारी हूँ.आपकी प्रतिक्रिया से सकारात्मक हौसला मिला,ध्यान देने के लिए धन्यवाद.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
December 14, 2011

मुझे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं है। हमेशा की तरह सहमत। ५/५

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 20, 2011

    भरता,और सदा की तरह एक बार फिर आपका साभार धन्यवाद :)

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 20, 2011

    भरता * भ्राता :)

sadhanathakur के द्वारा
December 14, 2011

राहुल जी ,काश आज के हर युवा में यही जोश हो ,,,,,,,,,,,आज इसी जोश और जूनून की जरूरत है ,,बहुत अच्छा लिखा आपने ,,आज कल आपकी प्रतिक्रिया नहीं मॉल रहे ,,,,,,,,आगे बधाई हो …………….

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 20, 2011

    आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद साधना जी,माफ़ी चाहूँगा वक़्त की कमी से मैं जरा इस मंच पर निरंतर नहीं आ पता,किन्तु शीघ्र ही आपके ब्लॉग पर आऊंगा :)

Tamanna के द्वारा
December 12, 2011

अपनी औकात समझो और औकात में रहो……………………..सही कहा आपने…. अजीब से हालात है मर्यादा की बात आज वो लोग करने लगे हैं जिन्हें स्वयं मर्यादा से कोई सरोकार है ही नहीं सता और पैसे की मस्ती से चूर ये लोग अपनी असलियत को भूल चुके हैं. साल में अगर इन्हें एकाध थप्पड़ या जूते पड़ भी गए तो इन निहायती बेशर्म लोगों का कुछ नही जाता. एक बार और अगली बार केबीसी में एक प्रश्न और जुड़ जाना चाहिए कि अमूल बेबी और कितने समय तक बेबी कहलाते रहेंगे.. कांग्रेस आलाकमान और उनके अमूल बेबी की जी हजूरी करने वालों क आत्म-सम्मान बिलकुल मर गया है. उन्हें कुछ भी कहने का कोई फर्क नहीं पड़ता.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 20, 2011

    स्वागत है आपका तमन्ना जी,आपने बिक्लुल सही कहा की इनकी चप्पलें चाटने वालों का आत्म-सम्मान बिलकुल मर चूका है,समय निकाल प्रतिक्रिया देने हेतु आभार. :)

dinesh aastik के द्वारा
December 10, 2011

ओजस्वी, क्रान्तिकारी एवं जाग्रत करने वाली रचना एवं रचनाकार को मेरा शत-शत नमन।

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 10, 2011

    उत्साहवर्धक सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार दिनेश जी :)

abodhbaalak के द्वारा
December 9, 2011

राहुल जी ये चिराग बुझने के पहले की farfaraahat …………. पता है समय करीब है इस लए ……….. अंजाम उनको भी पता है http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 10, 2011

    सही बात है बन्धु…प्रतिक्रिया का स्वागत करता हूँ,साभार धन्यवाद. :)

Abdul rashid के द्वारा
December 8, 2011

तुम जो भी हो हमारे रहम-ओ-करम के मोहताज हो,तुम्हें हम ने ही सर पर चढ़ाया है,दो पलों के बाद मिटटी में भी मिला सकते हैं.हम डरते नहीं हैं तुमसे,तुम्हारी ताकत का समूचा आस्तित्व हमारी ऊँगली के एक इशारे पर टिका हुआ है. अपनी औकात समझो और औकात में रहो. बेहद उग्र विचार लेकिन सच और शायद सभी पीड़ित भारतीय का दर्द सप्रेम अब्दुल रशीद

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 8, 2011

    आपने लेख को बिलकुल उचित परखा है रशीद भाई…प्रतिक्रिया देने के लिए आभार. :)

nishamittal के द्वारा
December 8, 2011

कहाँ कहाँ प्रतिबन्ध लगाया जाएगा.अन्यों को मर्यादित रखने के लियेस्वयम मर्यादित रहना तो सीखें.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 8, 2011

    बिलकुल सही बात निशाजी,अगर ये मर्यादित रहते तो दूसरे अपनी मर्यादा का उल्लंघन कभी न करते.

allrounder के द्वारा
December 7, 2011

बहुत तथ्यगत और सशक्त लेख पर हार्दिक अभिनन्दन राहुल जी !

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 8, 2011

    हार्दिक स्वागत सचिन जी,टिप्पणी देकर उत्साह बढ़ने के लिए धन्यवाद :)

Rajkamal Sharma के द्वारा
December 7, 2011

भाईसाहब …… नमस्कारम ! अगर आपका नाम राहुल है तो उसका नाम भी राहुल ही है- आप प्रियदर्शी है तो उसकी माता श्री का नाम प्रियदर्शनी था …… कुछ तो नाम की ही लिहाज रख लेते मेरे भाई ….. हा हा हा हा हा सुंदर लेख शुभकामनाये और मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 8, 2011

    हे हे हे,साष्टांग नमस्कार. नाम में क्या रखा है,एक और दिग्विजय सिंह थे,बहुत भले आदमी थे,और एक ये हैं ‘बेचारे’ अब देखिये आजकल तो सियार भी ‘सिंह’ का इस्तेमाल करते हैं. दुनिया उटपटांग है,किन्तु माल है तो ताल है. आपकी टिप्पणी के लिए आभार,और शुभकामनाएं पाकर मैं बहुत खुश हूँ,एवं आपको धन्यवाद देता हूँ. जितनी ज्यादा जिन्दा-दिल आपकी कलम है,उससे ज्यादा कही आप खुद… :)

vasudev tripathi के द्वारा
December 7, 2011

राहुल भाई, जहाँ तक सेंसरशिप की बात है ham सभी जानते हैं कि २०० करोड़ महीने की ताकत से ये कांग्रेस इलेक्ट्रोनिक और प्रिंट मीडिया को तो खरीद लेता है (डेक्कन हेराल्ड), किन्तु अब सोसिअल मीडिया पर जनता के गुस्से का विस्फोट इन नीचों की कलई खलता जा रहा है अतः उसके लिए सरकारी कुटिलता का सहारा लिया जा रहा है………… सरकार की और से सोसिअल मीडिया अधिकारिओं के साथ की गयी बैठकों में कांग्रेस व उसके नेताओं का sites पर होने वाले विरोध का विषय ही छाया रहा… सरकार ने 286 रिपोर्ट नेताओं के defamation के किए और मात्र १९ अश्लीलता के….. स्पष्ट है सिब्बल को किसकी चिंता है………. वैसे एक प्रवाह में इन कान्ग्रेसिओं की बखिया उधेड़ना बेहद पसंद आया, आपने कसार सी पूरी कर दी……….. धन्यवाद….!!

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 8, 2011

    स्वागत है आपका,मुझे तो लगता है कि इन मुफ्तखोरों के सामने सबसे बड़ी चिंता और इनके अतार्किक भय का कारण यह है कि इन्हें आभास हो गया है कि जनता के इरादे इन्हें नेस्तनाबूत कर देने के हैं,ये खुद को मिटने से बचाने के लिए बौखलाहट में मूर्खतापूर्ण हरकतें करते जा रहे हैं….यह आवाज करोड़ों हिन्दुस्तानियों की है,मैंने सिर्फ अपनी समझ से इसे व्यक्त भर किया है. हरविंदर सिंह तो एक अति-उत्साही,स्वार्थ-हीन देशभक्त युवा हैं,असली पागल तो साले सत्ता पर कुंडली मारे बैठे हैं,..इन कुकर्मियों के लिए कांग्रेस-माता की इज्जत भारत-माता से बड़ी है,इससे ज्यादा शर्मनाक एक छद्म राजनेता के लिए और क्या हो सकता है.

krishnashri के द्वारा
December 7, 2011

नमस्कार , बहुत सुन्दर ,सरल ,कुछ कहता ,कुछ बोलता ,कुछ पूछता प्रवाह मय आलेख . येचाहते हैं कि जो ये दिखाए ,देखो ,जो ये सुनाएँ ,सुनों , जो ये कहें ,कहो ,परन्तु जनता तो जनता है देखिये आगे क्या करती है . मेरी हार्दिक बधाई .

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 8, 2011

    जनता की चले पलटनिया,हिले ले झकझोर दुनिया.जनता की युग की स्रष्टा है,उसे अँधेरे में रखा जाता है,ताकि उसको अपनी ताकत का अंदाजा न हो,लेकिन कोई राह न देखकर वो तो पूरा जोर लगाएगी….और जिस दिन अपना पूरा जोर लगा दिया उस दिन पूरी भ्रष्ट-सेना भी पल भर में ख़ाक में मिल जायेगी,अगर अभी नहीं सुधरे तो यह दिन दूर नहीं होगा…आपकी टिप्पणी का स्वागत करता हूँ.

santosh kumar के द्वारा
December 7, 2011

राहुल जी ,.सादर नमस्कार आपके किसी प्रश्न का जबाब नहीं है कांग्रेसियो के पास ,…उनके लिए मर्यादित आलोचना का कोई मतलब नहीं है…टीवी पर बहस के दौरान शाही खानदान का नाम आते ही कांग्रेसी प्रवक्ता ऐसे उछलते हैं जैसे तवे पर मक्की का दाना …इतने कुकृत्य कर चुके हैं,.उनके पास तर्क है ही नहीं ,,अब कुतर्कों के सहारे जैसे तैसे बचने और बचाने में लगे हैं ,….. .हम डरते नहीं हैं तुमसे,तुम्हारी ताकत का समूचा आस्तित्व हमारी ऊँगली के एक इशारे पर टिका हुआ है…. बहुत अच्छे सार्थक लेख के लिए हार्दिक आभार

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 8, 2011

    आप बिलकुल सही कह रहे हैं संतोष जी,बेशर्म को लाज नहीं लगती,एहसानफरामोश है ये पुरे का पूरा झुण्ड.आपने समय निकालकर प्रतिक्रिया दी,आपका धन्यवाद.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
December 7, 2011

कई निरुत्तर कर देने वाले प्रश्नों से भरा ….. अच्छा लेख है राहुल भाई….. वास्तव में कोई भी कृत्य तब तक नैतिक हीं है जब तक की उसका कुप्रभाव गाँधी परिवार पर न पड़े….. पर ज्यों ही इनके विरुद्ध कुछ हो तो वो अनैतिक ……… दिग्विजय पर कभी सेंसर क्यों नहीं लगाया ये प्रश्न भी सोचनीय है……..

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 8, 2011

    सकारात्मक प्रतिक्रिया देकर हौसला बढ़ने के लिए हार्दिक धन्यवाद पियूष जी :) ये गाँधी परिवार के अघोषित किन्तु वफादार कुत्ते हैं,क्यूंकि ये उनकी जूठन पर जिंदगी गुजारते हैं. नमक का फ़र्ज़ अदा कर रहे हैं,अपने असली मालिक को अनदेखा कर रहे हैं,नतीजा भुगतेंगे..लोग जग रहे हैं.

shashibhushan1959 के द्वारा
December 7, 2011

“राहुल जी ने राहुल जी को ललकारा है, एक सत्य, दूजा असत्य पर खड़ा हुआ है. पहले संग भारत की सवा अरब जनता है, और दूसरा कुछ कन्धों पर पड़ा हुआ है.”" . निवेदन है, यह ललकार कायम रहनी चाहिए.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    December 8, 2011

    तहे दिल से आपका धन्यवाद,जब यूँ उत्साहवर्धन की खुराक मिलती रहेगी तो ललकार और ऊँची ही होगी,जब सभी आवाजें एक हो जायेंगी. आपकी टिप्पणी बहुत हौसला बढ़ाएगी,सादर आभार. :)


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