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चौथा बंदरः शरद जोशी

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rmcn94lएक बार कुछ पत्रकार और फोटोग्राफर गांधी जी के आश्रम में पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि गांधी जी के तीन बंदर हैं। एक आंख बंद किए है, दूसरा कान बंद किए है, तीसरा मुंह बंद किए है। एक बुराई नहीं देखता, दूसरा बुराई नहीं सुनता और तीसरा बुराई नहीं बोलता। पत्रकारों को स्टोरी मिली, फोटोग्राफरों ने तस्वीरें लीं और आश्रम से चले गए।

उनके जाने के बाद गांधी जी का चौथा बंदर आश्रम में आया। वह पास के गांव में भाषण देने गया था। वह बुराई देखता था, बुराई सुनता था, बुराई बोलता था। उसे जब पता चला कि आश्रम में पत्रकार आए थे, फोटोग्राफर आए थे, तो वह बड़ा दुखी हुआ और धड़धड़ाता हुआ गांधी के पास पहुंचा।

सुना बापू, यहां पत्रकार और फोटोग्राफर आए थे। बड़ी तस्वीरें ली गईं। आपने मुझे खबर भी न की। यह मेरे साथ बड़ा अन्याय किया है बापू।’

गांधी जी ने चरखा चलाते हुआ कहा, ‘जरा देश को आजाद होने दे बेटे! फिर तेरी ही खबरें छपेंगी, तेरी ही फोटो छपेगी। इन तीनों बंदरों के जीवन में तो यह अवसर एक बार ही आया है। तेरे जीवन में तो यह रोज-रोज आएगा।’

[दुर्भाग्य से आज इन्ही चौथे बंदरों का ज़माना है]



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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
January 7, 2012

राहुल जी, आपके महान शोध को नमन! आपने बड़े ही सूक्ष्म तीर चलाये हैं! देखन में छोटन लगे घाव करे गंभीर! बहुत बहुत बधाई!

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 8, 2012

    बहुत धन्याद सिंह जी :)

abodhbaalak के द्वारा
November 10, 2011

राहुल जी सच कहा है आपने, इन्ही ” बंदरो” का ज़माना है, पर समस्या ये है की ये बन्दर हमें नचा रहे हैं और हम हैं की ………….. कम शब्द में बड़ी बात, …….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    आपकी प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद अबोध बालक जी :)

vinitashukla के द्वारा
November 9, 2011

बहुत अच्छा और ‘धारदार’ लेख. बधाई.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    बहुत धन्यवाद विनीता जी.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
November 9, 2011

आज की तारीख़ में सचमुच इन्हीं चौथे बन्दर का बोलबाला है। यह यथार्थवादी एवं सामयिक लेख साझा करने के लिए आपका आभार,

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    वक़्त निकालकर टिप्पणी देने के लिए धन्यावा संदीप जी.

Santosh Kumar के द्वारा
November 8, 2011

आदरणीय राहुल जी ,..ये चौथा,. बन्दर की खाल में भेड़िया निकला ,..गाँधी जी बन्दर ही समझते रहे ,..बहुत आभार आपका

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    धन्यवाद संतोष जी

alkargupta1 के द्वारा
November 8, 2011

बहुत बढ़िया १०० प्रतिशत सत्य…..राहुल जी

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    धन्यवाद अलका जी.

nishamittal के द्वारा
November 8, 2011

बिलकुल सही कहा है आपने राहुल जी.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    धन्यवाद निशा जी.

Rajkamal Sharma के द्वारा
November 7, 2011

http://rahulpriyadarshi.jagranjunction.com/?p=345 प्रिय राहुल जी ….नमस्कार ! सबसे बड़ी मजबूरी तो यह है की इन बाकि के तिन बंदरों को इस चौथे की काली करतूतों को न चाहते हुए भी देख कर अनदेखा करना पड़ता है सुन कर भी अनसुना करना पड़ता है क्योंकि किसी भी बोल -कुबोल का इस बेशर्म पर कोई भी असर ज्यादा देर तक नहीं रहता है …. मुबार्कबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/05/“भ्राता-राजकमल-की-शादी”/

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    राजकमल जी,आपको भी जिंदगी के हर अवसर की शुभकामनाएं.

पीयूष पंत के द्वारा
November 7, 2011

सही कहा राहुल भाई….. पर मजबूरी ये है की इन बंदरों के हाथ मे उस्तरा भी है…

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    पियूष जी,और ये उस्तुरा हमारा ही गला काटने पर अड़ा हुआ है.

shashibhushan1959 के द्वारा
November 7, 2011

ये बन्दर नहीं हैं मरकट हैं, जो मार-काट मचाये हुए है.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    बिलकुल सही कह रहे हैं शशिभूषण जी.

malkeet singh jeet के द्वारा
November 7, 2011

बढ़िया व्यंग पर इन बंदरो पर अब व्यंग बाण असर नहीं डालते

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    धन्यवाद मलकीत जी,इनपर तो लात-जुटे भी असरदार नहीं होते हैं.

bharodiya के द्वारा
November 7, 2011

लेख छोटा है पर बात बहुत बडी कर दी है । बन्दर ही बन्दर है सब ।

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    November 11, 2011

    बहुत धन्यवाद भरोदिया जी,वक़्त निकाल के टिप्पणी देने के लिए.


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