जबां हिलाओ

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विजय मिली विश्राम न समझो

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ओ विप्लव के थके साथियों,
विजय मिली विश्राम न समझो


उदित प्रभात हुआ फिर भी छाई चारों ओर उदासी,
ऊपर मेघ भरे बैठे हैं किंतु धरा प्यासी की प्यासी;
जब तक सुख के स्वप्न अधूरे,
पूरा अपना काम न समझो;
विजय मिली विश्राम न समझो.


पद-लोलुपता और त्याग का एकाकार नहीं होने का,
दो नावों पर पग धरने से सागर पार नहीं होने का;
युगारंभ के प्रथम चरण की,
गतिविधि को परिणाम न समझो;
विजय मिली विश्राम न समझो.


तुमने वज्र प्रहार किया था पराधीनता की छाती पर,
देखो आँच न आने पाए जन जन की सौंपी थाती पर;
समर शेष है सजग देश है,
सचमुच युद्ध विराम न समझो;
विजय मिली विश्राम न समझो.

-बलवीर सिंह रंग



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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
September 1, 2011

बहुत ही सुन्दर! और समयानुकूल कविता उधृत कर सबका मन जीत लिया आपने! एक बार पुन: बधाई!

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    September 2, 2011

    सिंह जी,आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

Amita Srivastava के द्वारा
August 29, 2011

राहुल जी ,बहुत अच्छी कविता ,बधाई |

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 29, 2011

    धन्यवाद अमिता जी,मैं खुद बलबीर जी की इस रचना को यहाँ प्रस्तुत कर बहुत अच्छा महसूस कर रहा हूँ,प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद.

Santosh Kumar के द्वारा
August 29, 2011

राहुल जी , प्रेरक रचना के लिए हार्दिक आभार

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 29, 2011

    आपका शुक्रगुजार हूँ संतोष जी,टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

sadhana thakur के द्वारा
August 28, 2011

राहुल जी ,,,बहुत अच्छी रचना …..

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 29, 2011

    साधना जी,टिप्पणी के लिए आभार.

nishamittal के द्वारा
August 28, 2011

प्रेरनादायी रचना प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 29, 2011

    साभार धन्यवाद निशा जी.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
August 28, 2011

राहुल भाई, आपने बलबीर सिंह रंग जी की यह कविता यहाँ उद्धृत करके एक बड़ा ही नेक काम किया है। ऐसे विषयों पर मेरी-आपकी या यूँ कहें कि हमारी सक्रियता यूँ ही बनी रहे यही कामना है। हम साथ-साथ हैं। शुक्रिया,

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 29, 2011

    बहुत धन्यवाद संदीप भाई,हम हमेशा एक पथ के साथी हैं,आभार आपका.

Santosh Kumar के द्वारा
August 28, 2011

राहुल जी ,..अत्यंत प्रेरक रचना पोस्ट करने के लिए हार्दिक आभार

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 29, 2011

    संतोष जी,आपकी सदाशयता है.टिप्पणी के लिए धन्यवाद.

manoranjanthakur के द्वारा
August 28, 2011

बहुत ही उत्तेजक सुंदर बहुत बधाई

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 29, 2011

    बहुत बहुत आभार आपका मनोरंजन भाई :)

neelamsingh के द्वारा
August 28, 2011

राहुल जी इस क्रांतिकारी विचारधारा वाली रचना को पोस्ट करने के लिए धन्यवाद ! अज देश को ऐसे ही उद्वेलित कर देने वाले विचारों की जरूरत है | जय भारत , जय भारती !

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 29, 2011

    उत्साह बढ़ाने के लिए धन्यवाद नीलम जी,वन्दे मातरम. :)


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