जबां हिलाओ

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उठो सोनेवालों,क्रांति पुकारती है

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आज सभी आज़ाद हो गए, फिर ये कैसी आज़ादी
वक्त और अधिकार मिले, फिर ये कैसी बर्बादी;
संविधान में दिए हक़ों से, परिचय हमें करना है,
भारत को खुशहाल बनाने, आज क्रांति फिर लाना है.
:-डॉ. विजय तिवारी ‘किसलय’

अब लीजिये,स्वामी रामदेव को तो दिल्ली पुलिस रात के अँधेरे में अत्याचार मचा कर ले गयी थी,लेकिन ये क्या अन्ना हजारे और सहयोगियों को तो दिन-दहाड़े उनके घरों, सड़को से हिरासत में ले लिया गया…और वो भी बिना कोई कानून तोड़े….क्या सच में दिल्ली पुलिस इतनी मुस्तैद हो गयी है कि अब अपराधी को अपराध करने से पहले ही गिरफ्तार करने लगी है?
लेकिन इन दोनों आन्दोलनों में,जिनका दमन दिल्ली पुलिस ने किया(सरकार यही मानती है),एक बात जरूर मिलती है कि दोनों ही आन्दोलनों से भ्रष्टाचारियों के लिए भारी मुश्किल खड़ी होती….और दोनों ही पुलिस कारवाईयों में लोकतंत्र,मानवाधिकार और संविधान की अवहेलना का साक्षात दर्शन होता है,रामलीला मैदान की कारवाई कितनी बर्बर थी इसका उदाहरण वीरांगना राजबाला देवी हैं,जबकि सरकार और पुलिस इस बात को सिरे से नकार चुकी है कि कोई लाठी चार्ज हुआ हो….तो क्या यह दोनों कार्यवाईयां दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने भ्रष्टाचारियों के दबाव में की ?
आखिर कितनी आपात स्थिति आ गयी थी कि देश की पहली महिला आई.पी.एस.किरण बेदी को भी एहतियात के तौर पर हिरासत में लिया गया,यह निहायत शर्मनाक है …इस गंभीर अपराध के लिए सरकार दिल्ली पुलिस प्रशासन के विरुद्ध क्या निर्णय लेगी,यह पूरी तौर पर परदे के पीछे से दिल्ली पुलिस को कौन चला रहा है,इसको प्रमाणित ही करेगा,क्यूँ ऐसा किसके इशारों पर हो रहा है,ये सब जानते हैं,वो भी जो आज भी बेशर्मी से उनका समर्थन कर रहे हैं.
सरकार ने रामलीला मैदान में पुलिसिया कारवाई के बाद अपनी त्वरित हताशा भरी कारवाईयों से यह साबित करने में कोई कसर नहीं रख छोड़ी है कि ऐसा किसके इशारों पर हुआ.जनता अब सब समझ चुकी है,स्वामी रामदेव और उनके सहयोगियों पर विभिन्न प्रकार के आरोप लगाये गए,लेकिन उनमे से कोई प्रमाणित नहीं हो पाया,पहले कहा बालकृष्ण का पासपोर्ट फर्जी है,लेकिन साबित नहीं कर पाए,फिर कहा उनकी डिग्रियां फर्जी है,लेकिन यह भी साबित नहीं हो सका,अब कहते हैं कि उन्होंने जन्म तिथि गलत बताई है ,हद है यार.
अगर रामदेव या उनके सहयोगियों के खिलाफ कोई भी सबूत सरकार के हाथ लगा होता तो जितनी बौखलाहट सरकार में है,ये लोग आज सलाखों के पीछे होते…..जब अन्ना हजारे का आन्दोलन अवश्यम्भावी था,और भ्रष्ट लोगों को अपनी चूलें हिलती दिखीं तो अन्ना पर भी इसी तरह के आरोप लगाये गए,लेकिन जनता अब इनकी कुटिल चालों को समझ चुकी है.
अगर अन्ना और उनके सहयोगी भ्रष्ट हैं तो उन्हें लोकपाल बिल गठन के पैनल में क्यूँ चुना गया?अगर अन्ना या रामदेव भ्रष्ट भी होते,तो क्या वो अपने लिए कुछ मांग रहे हैं,वो तो जनता की आवाज उठा रहे हैं,तो क्या जनता भ्रष्ट है?क्या अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण आन्दोलन करने का अधिकार भी जनता के पास नहीं है?
जिस प्रकार आई एस आई से पैसे लेकर गुलाम नबी फाई ने तथाकथित बुद्धिजियों से अपने मुद्दे के पक्ष में आवाज उठवायी,उसी प्रकार रामलीला मैदान के दमन के पश्चात भ्रष्टाचारियों ने विभिन्न मोर्चों से भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन को बदनाम करने में पूरा जोर लगा दिया था..यह दोनों आन्दोलन एक दुसरे से पूरी तौर पर अलग कभी नहीं थे,किन्तु दोनों के मध्य दरार पैदा करने का काम भी बड़ी शिद्दत से हुआ,किन्तु दोनों तरफ के लोग समझदार हैं,वैसे बीच बीच में अन्ना और रामदेव को एक दुसरे का विरोधी भी बताया गया किन्तु,दोनों ओर से स्थितियां स्पष्ट हुई कि इनके बीच कोई मतभेद नहीं है.
इन तमाम बेबुनियाद आरोपों का उद्देश्य सिर्फ इतना ही है कि भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने में जो भी आम-जन के आन्दोलन का नेतृत्व करेगा,भ्रष्टाचारियों के कुत्ते,जिनका जन्म इंसान की योनि में हुआ है,उस राष्ट्र-नायक को बदनाम करने में अपनी पूरी ताकत से जुट जायेंगे,चाहें वो राष्ट्र नायक रामदेव हों या अन्ना.क्यूंकि उनकी जितनी सोचने की क्षमता है,उनका यही सोचना है कि ‘करिश्माई’ राष्ट्र नायक सिर्फ एक ही ‘परिवार’ में पैदा हो सकता है.
आज १७ अगस्त २०११ की सुबह मनीष सिसौदिया से जब एक पत्रकार ने पूछा कि स्वामी रामदेव आज दिल्ली आ रहे हैं,और अन्ना के आन्दोलन को शत-प्रतिशत समर्थन की घोषणा की है,तो इसे आपलोग किस रूप में स्वीकार करेंगे?
इसपर मनीष सिसौदिया ने कहा कि ‘स्वामी रामदेव तो बहुत पहले से भ्रष्टाचार के विरोध में आवाज उठाते रहे हैं,हमारे आन्दोलन शुरू करने से पहले से ही उन्होंने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है,हम उनके समर्थन का स्वागत करते हैं,समर्थन तो उनका हमारे साथ शुरू से ही है,यह बहुत उत्साहवर्धक बात है कि वो आ रहे हैं.’यह वक्तव्य सुनकर बहुत शांति मिली कि जो विरोधाभास पैदा कर दोनों आन्दोलनों को कमजोर करने कि कोशिश की जा रही थी,ऐसे वक्तव्यों से जनता को सच की जानकारी मिले और दोनों ही आन्दोलनों को लोग एक-दुसरे का पूरक मानते हुए लोग अपने मन में यह ठान लें,कि किसी भी अफवाह में नहीं पड़ना है…भ्रष्ट तंत्र को मिटाने के लिए कदम मिलाकर बढ़ना है.
राजनीतिक रैलियों में लाखों लोग दिल्ली आते हैं,कुछ लोग ट्रेन की पटरियों पर कई दिनों तक बैठ कर आन्दोलन करते हैं,लेकिन तब क़ानून व्यवस्था को कोई खतरा नहीं होता…किन्तु जो लोग शांतिपूर्ण आन्दोलन का अनुरोध करते हैं उनसे क़ानून व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो जाता है ,जनता को आखिर कितना मूर्ख समझेंगे ये बेशर्म भ्रष्ट दिल्ली पुलिस प्रशासन और सरकार….जनता अब सब समझ चुकी है.
अतः अब वक़्त आ गया कि एक साथ मिलकर भ्रष्टाचार के विरोध में खड़े हों,और जो लोग इस मुद्दे पर आन्दोलन से असहमति रखते हों उनसे आग्रह है कि इस प्रकार कि पुलिसिया कारवाई अमानवीय और स्वतंत्रता का हनन है.आपकी मांगे सही हो या गलत,यह बाद की बात है,किन्तु कोई हमसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार नहीं छीन सकता,और नपुंसक है वो सरकार जो हमारे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने में पूर्णतया असमर्थ है.
आज हमारी आजादी का अपहरण हुआ है…आइये हम इस तानाशाही के विरोध एवं लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपने घरों से निकलें,मैं भ्रष्ट जनों से भी आग्रह करता हूँ कि आप भी इस पुलिसिया तानाशाही और सरकारी नपुंसकता के विरोध में आगे आयें.
कम से कम हमारे मौलिक अधिकार हमसे मत छीनो.

“जो आग जला दे भारत की ऊँचाई,
वह आग न जलने देना मेरे भाई।”:



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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajkamal के द्वारा
August 19, 2011

जब विजिलेंस भी मोटी रकम लेकर छोड़ देती है तो भी हमे यह विश्वाश तो रखना ही होगा की अब भविष्य में ऐसा दुबारा नहीं होगा कम से कम लोकपाल के मामले में तो कोई माफ़ी नहीं होनी चाहिए ] :) :( ;) :o 8-) :|

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 20, 2011

    नमस्ते राजकमल जी,उम्मीद पे ही दुनिया टिकी है…हम उम्मीद करते हैं कि आने वाला समय बेहतर हो.लोकपाल ढुलमुल ना हो,इसकी आशा करता हूँ. आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करता हूँ. :)

abodhbaalak के द्वारा
August 19, 2011

राहुल जी भावनाएं जो इस रचना में हैं, उसका समर्थन करता हूँ, पर भार्श्ताचारी दुसरे गृह से नहीं आते, हम्मसे से ही होते हैं आज जो इस आन्दोलन का समर्थन करते नज़र आयेंगे कल वो ही आपको रिश्वत .,….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 19, 2011

    निस्संदेह नकारात्मक आशंकाओं को नजरअंदाज नही किया जा सकता,किन्तु लोकपाल के लागू हो जाने के बाद रिश्वत लेना-देना आसान नही रह जाएगा….हमें निराशावादी नही बनना चाहिए.कम से कम युवा वर्ग को सकारात्मक रहना चाहिए.

surendra shukla Bhramar5 के द्वारा
August 17, 2011

प्रिय राहुल प्रियदर्शी जी सार्थक , सामयिक लेख , व्यंग्य का पुट लिए दिल्ली पुलिस और सरकार की क्या बात करते हैं जो सब धोकर पी लिए लाज शर्म …सुना है न की सीधे का मुह कुत्ता चाटते हैं वही हो रहा ..बदमाश तो उनकी थाली भी छीन ले जाएँ तो नपुंसक से मुह दसो साल देखते रहते हैं … सुन्दर सन्देश सुन्दर आह्वान आप का …आओ आवाज बुलंद करें भ्रमर ५

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 19, 2011

    आपकी टिप्पणी समेत आपका स्वागत करता हूँ भ्रमर जी,नपुंसक दस साल में तो क्या पूरी जिंदगी में नपुंसकता से नही उबर सकता किन्तु अगर वो नपुंसक हमें प्रभावित करता है तो उसे परे हटना ही पड़ेगा.जनता को अपनी ताकत दिखानी ही पड़ेगी… ‘सहनशीलता,क्षमा,दया को तभी पूजता जग है; बल का दर्प चमकता उसके पीछे जब जगमग है.’

संदीप कौशिक के द्वारा
August 17, 2011

अगर पूरा देश इसी तरह से अन्ना जी के पीछे डटा रहा……….तो बदलाव होकर रहेगा राहुल भाई !! जय हिन्द ! जय भारत !! :)

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 19, 2011

    देश हमारा है,हम देश के हैं….हम डटे रहे तो देश डटा रहेगा. हम ना डिगे,देश का सर कभी ना झुकेगा. आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत करता हूँ संदीप जी,धन्यवाद. वन्दे मातरम :)

Santosh Kumar के द्वारा
August 17, 2011

राहुल जी,. जबरदस्त आह्वान वन्दे मातरम

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 19, 2011

    वन्दे मातरम संतोष जी,कदम मिलाकर चलना होगा…आपका साभार स्वागत है.

Alka Gupta के द्वारा
August 17, 2011

राहुल जी , इस लेख का प्रत्येक शब्द वर्तमान हालातों की एक सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता है…..उद्धरणों और वक्तव्यों सहित लिखे गए ओजस्वी व सशक्त लेख के लिए बहुत धन्यवाद !

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 19, 2011

    टिप्पणी देकर हौसला बढ़ाने के लिए आपका स्वागत है अलका जी,आभारी हूँ.

bharodiya के द्वारा
August 17, 2011

चोर के घर रेड गिरानी है तो चोर चुप बैठेगा , और वो भी बीना हथियार ? वो तो प्रतिकार करेगा ही । उसे प्रतिकार करनेका अधिकार नही है ?

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 19, 2011

    नमस्कार भरोदिया जी,इसी चोर को चौकसी का अधिकार जनता ने दिया है…वही अधिकार इससे जब छीन जायेगा तब देखेंगे कौन रेड गिराता है,और कहाँ से रेड निकलता है.टिप्पणी देने के लिए साभार धन्यवाद.

nishamittal के द्वारा
August 17, 2011

आम आदमी के (आँख खोले हुए) सवालों को जोशो खरोश के साथ मंच पर प्रस्तुत करने हेतु धन्यवाद राहुल जी.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 19, 2011

    हार्दिक धन्यवाद निशा जी,आपकी टिप्पणियाँ हमेशा से हौसला देती रही हैं..उत्साह बढ़ाने और उर्जा देने के लिए आभारी हूँ.

Nikhil के द्वारा
August 17, 2011

राहुल जी, वन्दे मातरम! जय हिंद!

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 19, 2011

    धन्यवाद निखिल जी.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
August 17, 2011

राहुल जी, आपकी लेखनी की आग ऐसे ही जलती रहे जो अंदरूनी जज़्बे को जगाती है। स्वतंत्रता का बलात् अपहरण करने वाले ये दरिंदे अब कुछ ही दिनों के मेहमान हैं, ऐसा मुझे विश्वास है। भारत की ऊंचाई को जलाने वाली आग को तो हम जलने नहीं देंगे मगर हमारे सीने की आग… दुष्यंत कुमार की पंक्तियाँ याद आ गईं..- मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, आग जलनी चाहिए…. जय हिंद, 

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 19, 2011

    बहुत धन्यवाद संदीप भाई,आपने हमेशा मेरा हौसला बढाया है,इसके लिए आपका शुक्रिया अदा नही करूँगा,कर्जदार बने रहना चाहता हूँ.हम मिलकर कदम बढ़ाएंगे…उन्हें पीछे हटना ही होगा,वरना धकेल दिए जायेंगे.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
August 17, 2011

राहुल भाई, जैसा आपने कहा की इन लोगों की जितनी सोचने की क्षमता है,उनका यही सोचना है कि ‘करिश्माई’ राष्ट्र नायक सिर्फ एक ही ‘परिवार’ में पैदा हो सकता है. पर ये केवल नाम के करिश्माई है…. करिश्मा क्या होता है ये अन्ना ने बता दिया है……… दलित के घर खाना खा कर वोट मांगे जा सकते हैं…. पर भूखे रखकर देश के लिए लड्पना राहुल के लिए करिश्मा नहीं है…..

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    August 19, 2011

    प्रतिक्रिया देने और समर्थन के लिए शुक्रिया पियूष भाई :) पूरा देश उनके झूठे करिश्मों की हकीकत जानता है,लेकिन कांग्रेसी कुत्ते वफादार होते हैं,थोबड़े पर कितने भी जूते बजा दो,अपने मालिकों के तलवे चाटना नही छोड़ेंगे.


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