जबां हिलाओ

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यह शर्मनाक है

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पिछले कुछ दिनों में देश में बड़ी दुस्साहसिक हरकतें हुई हैं…जिनपर विचार करें तो ऐसा लगता है कि वर्तमान में हम लोकतंत्र में नहीं,बल्कि किसी तानाशाही में जी रहे हैं.
यह बात लगभग हर आम हिन्दुस्तानी (दिग्विजय जैसों के अनुयायियों को छोड़कर) जानता है कि आज के समय में सबसे ज्यादा मुनाफे वाला कोई व्यवसाय है तो वो है राजनीति,राजनीति में प्रवेश पाते ही कई सारे उठाईगीरे देखते ही देखते सेठ बन जाते हैं,कल तक जो व्यक्ति साइकिल पर चलता था,देखते ही देखते उसके चमचों के लिए भी कई चमचमाती गाड़ियाँ नजर आने लगती है,ऐसा कोई भी सरकारी काम नहीं होता जिसमे शत प्रतिशत इमानदारी की अपेक्षा की जाए,दबंग रसूखवाले लोगों के नाम से ही अधिकतर सरकारी निविदाएं निबंधित होती हैं,यही तो मूल है हमारे नेताओं की बढती धन संपत्ति का.
आजादी के बाद से लगातार हमारे जनप्रतिनिधि हमें लूटते रहे,और हम उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाए,जब जब जनता ने आवाज उठाई,या चोरी पकड़ी गयी,एक जांच कमिटी बना दी जाती थी,जिसका परिणाम सिफर ही रहता था,हर बार,मुझे नहीं पता कि इन छह दशकों में कितने नेताओं को भ्रष्टाचार के लिए सजा हुई और उनसे कितना लूट का पैसा देश को वापस मिला…उलटे सरकार हर जगह भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आरोपी को बचाते हुए ही नजर आई है,चाहे एंडरसन की बात करें या क्वात्रोच्ची की,या फिर हमारे स्वदेशी चोर नेताओं की,व्याप्त भ्रष्टाचार पर सरकार इतनी बेबस नजर आई की लोगों के मन में यह बात पूरी तरह बैठ गयी की हम चाहे लाख जोर लगा लें नेताओं का कुछ नहीं बिगाड़ सकते,ये उनकी मर्जी पर है की वो कितना लूटना चाहते हैं,और कितना हमारे लिए छोड़ना चाहते हैं,आज के युग में कमीशनखोरी या दलाली खाना किसी शर्म की बात नहीं रह गयी है,और इस परंपरा को स्थापित करने का श्रेय भी हमारे राजनीतिक आकाओं को ही जाता है .
आजादी के बाद से भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी जन-आन्दोलन को सर नहीं उठाने दिया गया,हर सरकार कहती रही की वो भ्रष्टाचार को सर उठाने नहीं देगी,लेकिन इसकी जडें और गहरी ही जमती गयी.
भला हो स्वामी रामदेव का जिन्होंने भारत भर में घूम कर लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागृत किया एवं यह उम्मीद बंधाई कि जनता संगठित हो तो मिलकर भ्रष्टाचार को मिटा सकते हैं.कुछ लोग शुरू से ही यह दुष्प्रचार फैलाने लगे कि रामदेव राजनीति में आना चाहते हैं,जबकि रामदेव ने हमेशा ऐसी ख़बरों का खंडन ही किया है,और बिना राजनीतिक सलाहकारों की मदद लिए आम जनता की भावनाओं से जुड़कर अपने आन्दोलन में अनवरत आगे बढ़ते रहे,क्यूंकि उन्हें राजनीति नहीं करनी थी..
किरण बेदी,सुब्रह्मण्यम स्वामी जैसे लोग इस अभियान में रामदेव के साथ थे,ऐसा नहीं था कि इस आन्दोलन का निशाना सिर्फ एक पार्टी या कुछ ख़ास व्यक्तित्व ही थे,यह उन तमाम लोगों के खिलाफ है जो इस देश के साथ गद्दारी कर रहे हों,यह जरुरी नहीं है कि वो सिर्फ कांग्रेस पार्टी से हों,हर राजनीतिक दल का हर वो भ्रष्ट व्यक्ति,हर वो भ्रष्ट पूंजीपति,हर वो चोर व्यक्ति,जिसने पैसा गलत तरीके से कमाया है,उसके खिलाफ पहली बार इतने व्यापक तौर पर लोग एकजुट हुए,जो निस्संदेह भ्रष्टाचारियों के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन सकता था.
लेकिन जब यह अभियान पूरे रंग में आ गया और निर्णायक संघर्ष का आह्वान हुआ तो भ्रष्ट ताकतें बौखला गयी,वास्तव में भ्रष्टाचारियों के लिए इस आन्दोलन ने कोई विकल्प नहीं छोड़ रखा था.फलतः आन्दोलन को कुचलने के लिए लोकतंत्र की साड़ी मर्यादा टाक पर रख दी.
सरकार के इस तानाशाही रवैये और बिकाऊ पत्रकारिता के कुचक्र में पड़कर कई सारे लोग स्वामी रामदेव के खिलाफ आग उगलने लगे,कुछ लोग बहाने देने लगे कि जो सुर्ख़ियों में रहते हैं उन्ही का आन्दोलन चर्चा पा सका,बाकियों के आन्दोलन गुमनाम ही रह गए,मैं उनसे पूछता हूँ की जो आन्दोलन गुमनाम रह गए उनकी तो बात ही पूछना बेमानी है,जिस आन्दोलन ने इतना जनसमर्थन और सुर्खियाँ बटोरी उसमे आपने कौन सा योगदान दे दिया,अगर रामदेव की जगह दूसरा कोई ऐसे आन्दोलन को आगे ले जाता तो आप इन्ही तर्कों के आधार पर उसका भी विरोध करते,यह तय है.
लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में कुछ प्रश्न ऐसे मेरे मन में उठते हैं,जिनका जवाब मैं उन लोगों से चाहता हूँ जो रामदेव के खिलाफ चलाये भ्रष्ट तंत्र के दुष्प्रचार से प्रभावित हो बेवजह अपनी वैचारिक उल्टियां करते जा रहे हैं.

१.अगर रामदेव को मत देने का अधिकार है,तो वो राजनीति में हस्तक्षेप क्यूँ नहीं कर सकते?क्या लोकतंत्र में भागीदारी का मतलब आम आदमी के लिए केवल वोट देना भर ही है?क्या उसे अपने आस-पास का राजनीतिक कचरा देखकर आवाज उठाने का भी हक़ नहीं है?

२.अगर सरकार सूचना अधिकार कानून लाकर पारदर्शिता लाने की दलीलें देती हैं तो सोनिया गाँधी से जुडी जानकारी मांगने पर कोई जवाब क्यूँ नहीं देती?हम कैसे मान लें कि सरकार पारदर्शिता लाने को लेकर प्रतिबद्ध है?

३.कपिल सिब्बल शुरू में कहते रहे कि २ जी घोटाले में देश को कोई घाटा नहीं हुआ है,तो आज भूतपूर्व दूरसंचार मंत्री जेल में क्यूँ है?धोखेबाज और झूठा कौन है?

४.अगर रामदेव ‘ठग’ हैं तो केंद्र सरकार उन्हें ‘जेड’प्लस श्रेणी की सुरक्षा क्यूँ मुहैया कराती है?सरकार क्यूँ ठगों की सुरक्षा के लिए इतनी प्रतिबद्ध हो गयी?असली ठग कौन है ?

५.स्वामी रामदेव को जेड प्लस सुरक्षा पहले से ही प्राप्त है,ऐसी स्थिति में उनकी सुरक्षा पर खतरा की सूचना पाकर क्या पुलिस जेड श्रेणी से भी ज्यादा बेहतर सुरक्षा इंतजाम करने गयी गयी थी??क्या जेड प्लस की सुरक्षा स्तरहीन है?

६.जब लोग ट्रेन की पटरी जाम कर के आन्दोलन करते हैं तो वो लोकतांत्रिक कहा जाता है,और सोये हुए शांतिपूर्ण आन्दोलनकारियों पर डंडे बरसाना कैसा लोकतंत्र है?

७.दिल्ली पुलिस कहती है की ४ जून की रात को कोई लाठी चार्ज नहीं हुआ,तो राजबाला देवी की पिटाई किसने की?सारे सी सी टी वी कैमरों को पुलिस क्यूँ जब्त कर ले गयी?और घटना के बाद दिन भर न्यूज़ चैनल कहाँ की विडियो रेकॉर्डिंग दिखा रहे थे?

८.स्वामी निगमानंद अनशन करते हुए मृत्यु को प्राप्त हुए,इरोम शर्मीला पिछले दस सालों से अनशन पर हैं,सरकार कानों में तेल डाल कर सो रही है,ऐसी स्थिति में आपको क्यूँ लगता है कि स्वामी रामदेव को अनशन जारी रखे रहना चाहिए था..क्या आपको नहीं लगता कि जड़ तक सड़ चुके इस तंत्र को बदलने के लिए उनकी जिंदगी उनकी शहादत से ज्यादा जरूरी थी?

९.अगर सुब्रह्मण्यम स्वामी गाँधी परिवार के खिलाफ कुछ गलत बोलते हैं तो उनके अनुचर या वे खुद साक्ष्यों के आधार पर इसका खंडन क्यूँ नहीं करते?उनपर मुकदमा दर्ज कर मामले को अदालत में क्यूँ नहीं ले जाते?

१०.अगर स्वामी रामदेव विदेशों में जमा काली कमाई का गलत आंकड़ा बताते हैं तो सरकार प्रमाणिकता के साथ इस सन्दर्भ में सही आंकड़े को क्यूँ सामने नहीं रखती?

११.अगर रामदेव कहते हैं कि वो चाहते हैं कि चुनावों में उन्ही व्यक्तियों को मत दिया जाए जो इमानदार और स्वच्छ चरित्र के हों तो इसमें गलत क्या है?

कुछ ऐसी भी बातें हैं जिनका जवाब मुझे नहीं मिल पाता जैसे राजीव गाँधी ने ऐसी क्या उपलब्धि अर्जित कर ली थी जो उन्हें बाबासाहब भीमराव अम्बेदकर से पहले ही भारत रत्न दे दिया गया?या फिर रोबर्ट वढेरा की ऐसी क्या खासियत है कि उन्हें भारत में कई महत्वपूर्ण जगहों पर सुरक्षा प्रावधानों से छूट दी गयी है?खैर ऐसे बहुत सारे प्रश्न हैं,लेकिन मुद्दे की बात पर आते हैं.
मूल बात यह है कि पिछले छः दशकों में पहली बार जो जन-आन्दोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी ताकत से उठ खड़ा हुआ था उसे भी कुचक्र चलाकर लगभग ध्वस्त किया जा चुका है,यह भ्रष्ट तंत्र के लिए जितनी ख़ुशी की बात है,आम आदमी के लिए उतनी ही बड़ी निराशा की भी.जनता का आन्दोलन बड़ी बेशर्मी से कुचला गया और कुछ निठल्ले इस हालत में भी स्वामी रामदेव पर कीचड़ उछालते खुद में मग्न रहे,अगर रामदेव की मंशा राजनीतिक फायदा उठाने की है,तो जब वो वोट मांगने आयें,मत देना,किन्तु अभी जो मुद्दा उन्होंने उठाया है,उस मुद्दे पर आपका क्या रुख है,यही मायने रखता है.इस मुद्दे पर आपका विरोध आम जनता के हितों का विरोध क्यूँ नहीं माना जाये?
स्वामी रामदेव पर जो भी आरोप लगाये जा रहे हैं,सिर्फ इसी वजह से कि उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जन-आन्दोलन छेड़ रखा है?वरना क्या रामदेव ने कोई असंवैधानिक कार्य किया है,जो हम उनके प्रति पूर्वाग्रह पाल लें?ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलेगा जहां रामदेव ने कोई सांप्रदायिक अथवा गैर-जिम्मेदार वक्तव्य दिया हो.भ्रष्टाचारियों को तो रामदेव के चलाये आन्दोलन की सफलता में अपना-अपना घर उजड़ता दिख रहा है,
सो उनकी तरफ से अनेकों प्रकार के कीचड़ उछाले जा रहे हैं,किन्तु हम क्यूँ पूर्वाग्रह से ग्रस्त रहे,क्या सिर्फ इसी वजह से कि भ्रष्टाचार से पिसती जनता की लड़ाई लड़ने वाला यह व्यक्ति योग क्यूँ सिखाता है,राजनीति में क्यूँ नहीं आ जाता है?
दूसरी तरफ स्वामी रामदेव एक एक पैसे का हिसाब देने को तैयार हैं.
इतने सालों में पहली बार कोई आवाज भ्रष्टाचार के खिलाफ ऊँची उठी,और उस आवाज को दबाने की पुरजोर कोशिशें हो रही हैं,और एक हम हैं जो निराधार पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर अपनी अपनी गैर-जिम्मेदारी निभा रहे हैं.हमें यह तय करना होगा की इस मुहिम में हम किसके साथ हैं– भ्रष्टाचार के साथ या उसके खिलाफ,यह आम जनता ही है जो हमेशा पिसती रही है,आपको क्या लगता है इतनी गर्मी में देश के कोने कोने से ट्रेन का सफ़र कर आन्दोलन में पहुचे लोग सिर्फ AC की हवा खाने आये थे? यह गंभीर विचारणीय प्रश्न है कि जब भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने पर स्वामी रामदेव जैसी हस्ती (जिसे सरकार खुद उच्च कोटि की सुरक्षा मुहैया कराती है) का दमन किया जा सकता है,तो कोई आम आदमी इस भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना मुंह बंद रखने को तैयार न हो तो सरकार उसका क्या हश्र कर सकती है.
रामलीला मैदान की घटना के बारे में अगले दिन कपिल सिब्बल मीडिया से बात कर रहे थे,घटना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने सीधे कहा ‘this is a lesson for all ‘…मतलब कि यह सबके लिए एक सबक है….कैसा सबक?आखिर वो कहना क्या चाहते थे,ये शायद सब समझते हैं.और लगता है शायद इस वजह से भी कुछ लोगों की अंतरात्मा डर गयी और रामलीला मैदान में हुई अन्यायपूर्ण कारवाई की भर्त्सना शोर्ट-कट में करके ये सब रामदेव के पीछे पिल पड़े…..और वो भी क्यूँ….
सिर्फ एक ही कारण है…….क्यूंकि रामदेव लोगों को योग सिखाते हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सांवैधानिक और शांतिपूर्ण आन्दोलन का नेतृत्व रहे थे.

Sibal's assurance letter to Swami Ramdev

Sibal's assurance letter to Swami Ramdev

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

पीयूष के द्वारा
June 20, 2011

राहुल भाई….. बहुत बढ़िया लेख….. वास्तव मे यहाँ लोग केवल कह कर ही देशभक्ति दिखाते हैं…… वो कहते हैं की ऐसा हो…. वैसा हो….. पर जब कोई ये सब करने को आगे आता है तो ये पीछे हट जाते हैं……… और उस पर व्यक्ति पर ही सवाल खड़े कर देते हैं…….. क्योकि शब्दों से आगे बढ्ने की सामर्थ्य जुटाने के लिए ज़मीर की जरूरत होती है……. और इस देश की जनता अपना जमीर हर रोज अपने निजी स्वार्थ के लिए बेच देती है………

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 23, 2011

    पियूष जी,आपने बिलकुल सही कहा है,महज बयानबाजी से कुछ हासिल नहीं होने वाला,जो हमारे भले के लिए उठ खड़े होते हैं,हम उन्हें ही मुजरिम बना देते हैं.स्वार्थ का त्याग किये बिना परमार्थ की बात सोचना भी व्यर्थ ही होगा,आपके अमूल्य प्रतिक्रिया हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद.

Vinita Shukla के द्वारा
June 20, 2011

सत्तारूढ़ पार्टी के दोहरे मापदंडों को बेनकाब करता हुआ सार्थक लेख. बधाई.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 23, 2011

    आपके समर्थन हेतु हार्दिक आभार विनीता जी.

Tamanna के द्वारा
June 20, 2011

किसी भी देश की राजनैतिक परिस्थितियां उस देश के सामाजिक हालातों को दर्शाती है, अब हम इसी से यह अंदाजा भी लग सकते है कि भारतीय लोकतंत्र कैसी परिस्थितियों से जूझ रहा है. बढिया लेख http://tamanna.jagranjunction.com/2011/06/15/characteristics-of-baba-ramdev-and-annas-anshan-and-analysis/ http://tamanna.jagranjunction.com/2011/06/20/role-of-politics-in-indian-democracy/

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 23, 2011

    धन्यवाद तमन्ना जी.

Tamanna के द्वारा
June 20, 2011

किसी भी देश की राजनैतिक परिस्थितियां उस देश के सामाजिक हालातों को दर्शाती है, अब हम इसी से यह अंदाजा भी लग सकते है कि भारतीय लोकतंत्र कैसी परिस्थितियों से जूझ रहा है. बढिया लेख http://tamanna.jagranjunction.com/2011/06/15/characteristics-of-baba-ramdev-and-annas-anshan-and-analysis/ http://tamanna.jagranjunction.com/2011/06/20/role-of-politics-in-indian-democracy/

Tamanna के द्वारा
June 20, 2011

राजनीति अब हमारे लोकतंत्र का आधार बन गई है, कोई भी कदम राजनीति को ध्यान मे रखे बिना नहीं उठाया जाता…..बढिया लेख के लिए बधाई http://tamanna.jagranjunction.com/2011/06/20/role-of-politics-in-indian-democracy/ http://tamanna.jagranjunction.com/2011/06/15/characteristics-of-baba-ramdev-and-annas-anshan-and-analysis/

neelamsingh के द्वारा
June 19, 2011

राहुल जी ! वर्त्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए ,तथा भ्रष्ट तंत्र पर कटाक्ष करते हुए जो रचना आपने लिखी है वह काबिले तारीफ़ है | देश को इस समय ऐसे ही रचनाकारों की जरूरत है ,लगे रहिये | बधाई !

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 23, 2011

    नीलम जी नमस्कार,आपकी शुभकामनाओं के लिए आपका हार्दिक आभार.


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