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रामदेव से रार क्यों

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परसों रात को घर पर बैठा रात में कॉमेडी चैनल देख रहा था,बीच में व्यावसायिक विज्ञापन आया तो कुछ देर के लिए सोचा कि समाचार देख लेता हूँ,मैंने चैनल बदल कर एन डी टी वी लगाया,नीचे फ्लैश पर लिखा आ रहा था’ब्रेकिंग न्यूज़-बाबा रामदेव दिल्ली पहुँच चुके हैं,एअरपोर्ट पर उनके स्वागत हेतु केंद्र सरकार के मंत्री गए.’दो प्रस्तोता अभिज्ञान प्रकाश और रविश कुमार मौजूद थे.इसी मुद्दे को लेकर चर्चा गरमाई हुई थी.
महात्मा गाँधी के पुत्र श्री तरुण गाँधी भी उनके साथ चर्चा में शामिल थे…रविश कुमार बाबा रामदेव के विषय में बड़े ही तार्किक अंदाज़ में अपना विरोधाभास दर्ज करा रहे थे,उनके तर्कों की बानगी देखिये..उन्होंने कहा’बाबा रामदेव दिल्ली एअरपोर्ट पर उतरते हैं,सरकार के दो मंत्री उनसे मिलते हैं,सरकार की तरफ से क्या कोशिशें हो रही हैं,इसकी जानकारी बाबा रामदेव को दी जाती हैं,लेकिन फिर भी न जाने क्यूँ बाबा रामदेव अपने सत्याग्रह को लेकर अड़े हुए हैं(?).और आज उन्होंने अपने स्टैंड से पलटते(?) हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में नहीं रखना चाहिए,ऐसा कहकर उन्होंने अन्ना हजारे के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है(?).तरुण गाँधी भी रामदेव की हठधर्मिता(?) से खासे नाराज नजर आ रहे थे,शायद वे यह समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर जब मंत्रियों ने उनकी एअरपोर्ट पर खुशामद की पूरी कोशिश की तब भी वो क्यूँ सत्याग्रह पर अड़े हुए हैं.मैं थोड़ी देर के लिए इसी चैनल को देखने लगा.
लेकिन मैं यह नहीं समझ पाया कि जब कोई किसी मांग को लेकर उठ खड़ा होता है,तो उसकी सिद्धि से पूर्व अपने कदम वापस खींच लेने की बात भी सोच पाना किस तार्किक दृष्टि से संभव है.हाँ अगर ये होता कि सरकार ने काले धन को वापस लाने की मांग स्वीकार ली होती,भ्रष्टाचार मिटाने का सार्थक प्रयास दिखाया होता,उसके बावजूद रामदेव अगर सत्याग्रह पर अड़े रहते तब ये हठधर्मिता कही जा सकती थी,किन्तु उसके पहले उनके ‘मान’ जाने की बात भी सोचना मुझे तो निरी मूर्खता ही लगती है.
खैर इसी प्रोग्राम में बाद में बाबा रामदेव से भी संपर्क किया गया…उन्होंने बड़े ही सधे शब्दों में अपनी टिपण्णी देते हुए कहा कि “सबसे पहले मैं आप सब को यह बता दूं कि भ्रष्टाचार के विरोध में अन्ना हजारे भी हमारे साथ हैं,वो भी शीघ्र ही हमारे साथ सत्याग्रह में मंच पर दिखेंगे,मेरी मांग यह है कि विदेश में जमा काले धन को वापस लाया जाये,ऐसी व्यवस्था हो कि काला धन देश से बाहर न जा सके और भ्रष्टाचारियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले,ऐसा प्रावधान या अध्यादेश सरकार जब तक नहीं लाएगी,मेरा सत्याग्रह चलता रहेगा…यह ६४ वर्षों से किये जा रहे लूट और भ्रष्टाचार का मामला है,इससे निबटने में जितना दिन लगेगा,लगायेंगे,पूरी ताकत झोंकनी होगी,मैं अपने सत्याग्रह पर प्रतिबद्ध हूँ,और जब तक इस बात की शत प्रतिशत गारंटी नहीं मिल जाती,सत्याग्रह से पीछे हटने का प्रश्न ही नहीं है….और लोकपाल के बारे में मेरा यही प्रश्न है कि इस बात की क्या गारंटी है कि लोकायुक्त सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश से ज्यादा ईमानदार होगा,और लोकतंत्र में प्रधानमंत्री को लोकायुक्त के दायरे में लाना क्या वैधानिक रूप से सही होगा,मैं इस मामले पर व्यापक बहस चाहता हूँ ताकि लोकायुक्त की भूमिका ज्यादा स्पष्ट हो सके,मैंने ऐसा कभी नहीं कहा कि उन्हें इसके दायरे में आना चाहिए या नहीं.”
इसके बाद मुझे प्रस्तोताओं के चेहरे देखकर मजा आ रहा था,क्यूंकि उनकी पिछले आधे घंटे की सारी बकवासें अब बेबुनियाद सिद्ध हो गयी थी,खैर अब उनके ‘विदा लेने’ का वक़्त भी हो गया था,अगले दिन सुबह में प्रभात खबर में फिर से इसी टाइप की कुछ बातें पढ़ी कि ‘अन्ना के विरोध में उठ खड़े हुए रामदेव.”प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से बाहर रखने की मांग की’….इन बातों पर आधारित कई सारे आलेख भी दिन में पढ़े,कोई कहता रहा कि लोकपाल पर यु-टर्न से ऐसा लगता है सरकार ने उन्हें मैनेज कर लिया है और उन्हें अन्ना के खिलाफ इस्तेमाल करेगी…लोगों को बहुत शंका थी कि लोकप्रियता के चक्कर में रामदेव अन्ना को ख़ारिज कर खुद की शोहरत बटोरना चाहते हैं….कांग्रेस-पोषित मीडिया ने दिन भर इतनी अफवाहें फैलाई कि शाम में खुद अन्ना हजारे को भी कहना पड़ा कि सरकार हमें तोडना चाहती है,अन्ना हजारे ने शनिवार से प्रस्तावित बाबा रामदेव के अनशन को पूरा समर्थन देते हुए उन्हें सरकार की चालों में न आने की सलाह भी दी है। अन्ना ने कहा है कि सारी मांगें मान लेने का आश्वासन देकर बाद में पलट जाने की सरकार की नीति से बाबा रामदेव को सतर्क रहना चाहिए।
मजबूत लोकपाल बिल की मांग को लेकर अनशन कर चुके अन्ना हजारे ने कहा कि जो भी करप्शन के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, उन्हें सरकार की झूठी बातों से ही खुश नहीं हो जाना चाहिए। अन्ना ने सिविल सोसायटी में फूट की बात को गलत बताते हुए कहा कि वह रविवार को रामलीला मैदान जाकर बाबा रामदेव के सत्याग्रह में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, ‘ मैं बाबा रामदेव का साथ दूंगा जिससे कि सरकार दोबारा वैसा न कर सके जैसा उसने हमारे साथ किया था। हम साथ मिलकर करप्शन के खिलाफ और बड़ा संघर्ष करेंगे। ‘
उन्होंने कहा कि ‘ चार-चार मंत्रियों का एयरपोर्ट पर जाना बताता है कि दाल में कुछ काला है। बातचीत एक मंत्री के जरिए भी हो सकती है। लेकिन, लेटर साइन करना, बड़े-बड़े वादे करना यह सब समय बिताने के लिए होता है। और जब समय बीत जाता है तो फिर वे (सरकार के मंत्री) वैसा ही करते हैं जैसा चाहते हैं। ‘
अन्ना ने कहा, ‘ जब मैं अनशन पर बैठा था तो एक समय ऐसा आया कि सरकार ने हमारी सारी मांगें मान लीं। लेकिन वे पलट गए हैं। ‘
सरकार पर आंदोलनकारियों को धोखा देने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, ‘ अगर सरकार एक बार कुछ मुद्दों पर सहमति जताती है और मान लेती है कि प्रधानमंत्री लोकपाल के दायरे में होंगे और फिर बाद में पलट जाती है तो यह धोखा है। ‘
बाबा रामदेव की गलती यही है कि वह एक सन्यासी हैं,जो लोगों को योग की शिक्षा देते हैं,साथ में अगर कुछ अच्छी चीजों के लिए लोगों से आग्रह करते हैं तो इसमें बुरा क्या है?बाबा रामदेव के पास उनकी और उनके ट्रस्ट की पूरी संपत्ति के पैसे-पैसे का हिसाब है,और यह आरोप कोई नहीं लगा सकता कि उन्होंने यह संपत्ति गलत तरीके से अर्जित की,न ही उन्होंने सरकार से कभी कर की चोरी की,उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे कभी भारत की छवि धूमिल हुई हो या संविधान का उल्लंघन हुआ हो.
नाचने गाने वाले अभिनेता,खिलाड़ी इत्यादि जब सामाजिक समस्यायों के साथ जुड़ सकते हैं तो अभिजात्य-वर्ग और उसके पैसे पर पलता मीडिया एक योग-गुरु के सामजिक आन्दोलन खड़ा करने पर बेवजह का इतना शोर-गुल क्यूँ करवा रहा है ?
सीधी सी बात है जिसने भी सरकार को चूना लगाकर अपनी प्रतिष्ठा बना रखी है,उसे तो भ्रष्टाचार के विरोध में खड़ा होता यह आन्दोलन फूटी आँखों भी नहीं सुहाएगा…कुछ लोग मुद्दे को मोड़ते हुए इस आधार पर बाबा रामदेव की निंदा कर रहे हैं कि बाबा अपनी खुद की पार्टी बनायेंगे और उनका सपना प्रधानमंत्री बनना है,जबकि रामदेव कई सारे सार्वजनिक मंचों पर यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं है,वो खुद अपने घर का हिसाब-किताब भी नहीं सँभालते हैं,देश सँभालने की बात भी सोचना उनके लिए निरर्थक है,भले ही लूटेरे हर ओर बैठे देश को लूटें लेकिन एक बाबा के राजनीति में प्रवेश की बात सोचना भर भी एक शर्मनाक गुनाह है. ये ऐसी अफवाहें हैं जिनका उपयोग सरकार रामदेव के विरुद्ध माहौल बनाने में कर सकती है.
मुझे नहीं लगता कि बाबा रामदेव किसी गलत मांग को लेकर उठ खड़े हुए हैं,भ्रष्टाचार से समूचा देश त्रस्त है,अमीर-गरीब के बीच की खाई लगातार बढती ही जा रही है,मुझे उनकी मांगे उचित लगती हैं.मैं यह नहीं समझ पाता हूँ कि आखिर कुछ लोग इस आन्दोलन के इतने खिलाफ क्यूँ हैं?इसका एक बड़ा कारण यह भी हो सकता है कि रामदेव भगवा धारण करते हैं,लेकिन मेरी समझ से यह कोई समस्या नहीं होनी चाहिए.
यह आन्दोलन प्रभाव की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है,इसे तोड़ने की कोशिशों से बचते हुए इस आन्दोलन को परिणति तक पहुंचना ही होगा,यह जनता के अधिकार की लडाई है,खैर मैं तो इस आन्दोलन में भ्रष्टाचार के खिलाफ हूँ और आप…..

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
June 4, 2011

सरकार के पेट में तो मरोड़ उठ ही रही है साथ ही साथ यहाँ ब्लोगर मंच पर भी कुछ लोगों के पेट में मरोड़ के साथ उल्टियाँ भी हो रही हैं, अनाप शनाप लिखे जा रहे हैं, इसी से लगता है की ये भी ठगों के हिस्सेदार हैं, ये धूर्त कांग्रेसी देश का बंटाधार किये जा रहे हैं, पूरे देश में लूट खसोट मचा रखा है, और उनका साथ देते ये मिडिया और कुछ ब्लोगर विधवा विलाप किये जा रहे हैं. सराहनीय ब्लॉग … जय भारत

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 4, 2011

    आपके समर्थन के लिए आपका साभार धन्यवाद शिवेंद्र जी. समस्या की जडें इतनी गहरी हैं कि इन्हें उखाड़ने के लिए पूरा जोर लगाना होगा,जल्दी में सिर्फ झांसा मिल सकता है,लड़ाई लम्बी चलेगी.

    Marel के द्वारा
    June 14, 2011

    Now we know who the sneisble one is here. Great post!

डा.. एस शंकर सिंह के द्वारा
June 4, 2011

आपने सारी स्थिति साफ़ साफ़ स्पष्ट कर दी है. बाबा रामदेव की छवि धूमिल करने, देश में भ्रम फैलाने के लिए प्रिंट और टी वी मीडिया में कांग्रेस द्वारा प्रायोजित sustained campaign चलाया जा रहा है. आजकल निष्पक्ष न होकर paid news का ज़माना है. NDTV इसके लिए विख्यात है. राडिया टेप में बरखा दत्त की भूमिका सबको पता है मैनें भी TV चैनलों पर paid पत्रकारों की भूमिका को देखा है. भ्रम फैलाने वालों में NDTV के रवीश कुमार, अभिज्ञान प्रकाश, Outlook के विनोद मेहता,Hindustan Times के विनोद शर्मा Times of India की बाची करकारिया को उनके कुतर्कों से आसानी से पहचाना जा सकता है. इन लोगों को कांग्रेस की Dirty Tricks Department द्वारा भ्रम फैलाने का काम दिया गया है. कांगेस की Dirty Tricks Department के मुख्य कार्यकारी दिग्विजय सिंह हैं. दिग्विजय सिंह के अनर्गल प्रलाप बेवजह नहीं हैं. एक अच्छे लेख के लिए मुबारक़बाद

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 4, 2011

    डॉक्टर साहब,सादर नमस्कार,आपने इस आलेख का बहुत ही उत्तम आकलन किया है,साथ में दिए आपके उदाहरणों से भी मैं सहमत हूँ,यह एक बड़ी जटिल साजिश है,जिससे पार पाना ही होगा,वक़्त निकलकर टिप्पणी देने के लिए आपका आभारी हूँ.

    Kaedon के द्वारा
    June 14, 2011

    Good point. I hadn’t thguhot about it quite that way. :)

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 14, 2011

    Thanks Kaedo,that you got it,thanks a lot for ur response,keep reading :)

    bharodiya के द्वारा
    July 1, 2011

    कोई अचोरी पचोरी भी है उसे आप भुल गए । वो टी.वी. मे मजमा लगाता है । पन्चायत बैठता है । ५०-१०० कोन्ग्रेसी चमचे या ५०-५० रुपये थमा कर बेकारो की टोली ईकट्ठा करता है । सब को तरफ से ही बोलना है ।

Abdul Rashid के द्वारा
June 3, 2011

रार बाबा रामदेव से नहीं बल्कि सोंच से है सोंच ऐसी के हर कामयाब इंसान के प्रति लोग गलत ख्याल बना लेते है वह भी अफवाहों की कमजोर सबूतों पर शायद अच्छा लगता हो लोगो को या कामयाब को कोसने से दिल को सुकून मिलता हो.बहरहाल कुछ भी हो,किसी के कहने से सूरज ठंडा व चाँद गर्म नहीं हो जाता. अब्दुल राशीद

    ASHUTOSH के द्वारा
    June 3, 2011

    nice one…I really liked it

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 4, 2011

    राशीद जी एवं आशुतोष जी,आप दोनों भी इस सोच से सरोकार रखते हैं…यह हौसला बढ़ने वाली बात है,राशीद जी आपने जो कहा है बहुत सही बात है,किसी के कहने से कोई फर्क नहीं पड़ता,इंसान की असलियत असलियत ही रहती है,आप दोनों को समय निकालकर टिप्पणी देने के लिए मैं ढेर सारा धन्यवाद देता हूँ.

manoranjan thakur के द्वारा
June 3, 2011

श्री राहुलजी नए लुक मे दमदार blog बधाई

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 4, 2011

    :) धन्यवाद मनोरंजन जी.

नीरज नीखरा के द्वारा
June 3, 2011

हम भी पूरा समर्थन दे रहे हैं राहुल जी | क्यूंकि हम समाधान का हिस्सा हैं समस्या का नहीं neerajnikhra.jagranjunction.com 

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 4, 2011

    समर्थन देने और हौसला बढ़ने के लिए आपका आभार नीरज जी,समाधान अनिवार्य है.

वाहिद काशीवासी के द्वारा
June 3, 2011

राहुल जी, आपसे सहमत हूँ| इस मामले पर यह कहना चाहूँगा कि हमें या जानना ज़रूरी है कि आंदोलन किस प्रयोजन अथवा उद्देश्य से किया जा रहा है। इसके अलावा नेतृत्व कौन कर रहा है यह उतना मायने नहीं रखता। हालांकि यहाँ तो अगुआ भी निष्कलंक हैं| इस मुद्दे से जो असहयोग की भावना रखता है उसे इस देश का नागरिक कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। साभार,

    arvind avasthi के द्वारा
    June 3, 2011

    राहुल जी , बधाई जबान खोलने के लिए , आम आदमी को इसी तरह लिखना बोलना होगा / साभार

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    June 4, 2011

    संदीप जी एवं अरविन्द जी,साभार नमस्कार. आप लोगों का वैचारिक समर्थन देखकर बहुत ख़ुशी हुयी…आम आदमी की आवाज सुनी जानी चाहिए.वक़्त निकाल कर टिपण्णी देने के लिए आप दोनों का आभार.


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